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पत्रकारों और नागरिकों के स्कूल प्रवेश पर रोक का फरमान! डिंडौरी बीईओ के विवादित संदेश से मचा बवाल

akvlive.in

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– संकुल ग्रुप में जारी निर्देश पर उठे सवाल, पारदर्शिता और जवाबदेही पर खड़े हुए गंभीर प्रश्न

डिंडौरी न्यूज । जनजाति कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित शासकीय विद्यालयों की बदहाल स्थिति एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। इस बार वजह स्कूलों की जर्जर व्यवस्था नहीं, बल्कि डिंडौरी में पदस्थ विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) सतीश धुर्वे द्वारा संकुल समूह में जारी किया गया एक कथित विवादित संदेश है। इस संदेश में कथित तौर पर पत्रकारों एवं अन्य नागरिकों को विद्यालय परिसर में प्रवेश नहीं देने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके बाद आमजन, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों में नाराजगी देखने को मिल रही है।

जिले में लंबे समय से जनजाति कार्य विभाग के कई विद्यालय मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। कहीं स्कूल भवन ही नहीं हैं तो कहीं जर्जर भवनों में बच्चों की कक्षाएं संचालित हो रही हैं। कई विद्यालयों में रंगमंच, किचन शेड अथवा अस्थायी कमरों में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा शिक्षकों की अनुपस्थिति, समय पर स्कूल नहीं पहुंचना और शैक्षणिक गतिविधियों में लापरवाही जैसे मामले भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं।

इसी बीच बीईओ द्वारा जारी कथित निर्देश ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। बताया जा रहा है कि संकुल स्तर के व्हाट्सएप समूह में भेजे गए संदेश में पत्रकारों और अन्य नागरिकों को विद्यालय में प्रवेश नहीं देने के निर्देश दिए गए हैं। यह संदेश सामने आने के बाद लोगों ने इसे पारदर्शिता और जवाबदेही के विपरीत बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है।

जागरूक नागरिकों का कहना है कि विद्यालय केवल सरकारी भवन नहीं, बल्कि देश के भविष्य के निर्माण के केंद्र हैं। ऐसे में विद्यालयों की शैक्षणिक गतिविधियों, व्यवस्थाओं और शिक्षकों की कार्यप्रणाली पर अभिभावकों एवं समाज की निगरानी स्वाभाविक और आवश्यक है। उनका आरोप है कि यदि विद्यालयों में सब कुछ नियमानुसार संचालित हो रहा है तो पत्रकारों और नागरिकों के प्रवेश पर रोक लगाने की आवश्यकता ही क्यों पड़ रही है।

लोगों का यह भी कहना है कि शासन स्वयं अपनी योजनाओं, उपलब्धियों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों का व्यापक प्रचार-प्रसार मीडिया के माध्यम से करता है तथा प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने की बात कहता है। ऐसे में यदि कोई जिम्मेदार अधिकारी पत्रकारों और आम नागरिकों को विद्यालयों से दूर रखने के निर्देश देता है तो यह शासन की मंशा के विपरीत माना जाएगा।

बीईओ द्वारा संकुल स्तरीय व्हाट्सएप ग्रुप में प्रसारित संदेश…. 

“समस्त विकासखंड शिक्षा अधिकारी, समस्त बी आर सी एवं समस्त संस्था प्रमुख कृपया ध्यान दें! किसी भी पत्रकार या किसी भी व्यक्ति को स्कूल के अंदर न आने दें किसी को भी फोटो या वीडियो न बनाने दे और न विद्यालय से संबंधित न्यूज दें। यदि किसी भी विद्यालय की जानकारी फोटो या वीडियो वाइरल होता है। तो इसकी जिम्मेदारी आपकी होगी।

किसी को भी बेवजह कहीं भी कैमरा लेकर न तो वीडियो बनाने दें, न ही कोई बाईट दें। और न ही ऐसी नौबत आने दें। यदि ऐसी स्थिति उत्पन्न होती हैं तो संस्था प्रमुख स्वयं जिम्मेदार होगा।”

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..

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