डिंडौरी न्यूज़ । नगर परिषद् डिंडौरी द्वारा नगर में लगाए गए कथित अवैध होर्डिंग के मामले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। शिकायतकर्ता रोहित कांस्कार ने आरोप लगाया है कि नगर परिषद् ने पहले शिकायत के आधार पर अवैध होर्डिंग हटाई, लेकिन कुछ ही देर बाद किसी अधिकारी के कथित निर्देश पर उसी स्थान पर दोबारा होर्डिंग लगा दी गई। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही बल्कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना से भी जुड़ सकता है।
रोहित कांस्कार के अनुसार उन्होंने 16 जुलाई 2026 से लगातार नगर परिषद् और संबंधित अधिकारियों को आवेदन एवं शिकायतें देकर नगर क्षेत्र में लगाए गए अवैध होर्डिंग हटाने की मांग की थी। शिकायतों के बाद नगर परिषद् का अमला शाम लगभग 6:10 बजे मौके पर पहुंचा और संबंधित होर्डिंग को हटा दिया। इस कार्रवाई से शिकायतकर्ता को उम्मीद थी कि नियमों के अनुरूप अवैध होर्डिंग हटाने की प्रक्रिया पूरी कर दी गई है।

हालांकि शिकायतकर्ता का आरोप है कि कार्रवाई के कुछ ही समय बाद किसी अधिकारी के पास फोन आने के पश्चात नगर परिषद् के कर्मचारियों ने उसी स्थान पर पुनः वही होर्डिंग लगा दी। उनका कहना है कि यदि ऐसा हुआ है तो यह नगर परिषद् की कार्रवाई पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है और यह दर्शाता है कि नियमों का पालन करने के बजाय प्रभाव में आकर निर्णय लिया गया।
रोहित कांस्कार ने कहा कि यह कृत्य कानून एवं न्यायालय के निर्देशों की भावना के विपरीत है। उन्होंने मांग की है कि जिस अधिकारी, राजस्व अधिकारी अथवा अन्य जिम्मेदार व्यक्ति के संरक्षण में दोबारा होर्डिंग लगाए जाने का निर्णय लिया गया, उसके विरुद्ध नियमानुसार जांच कर कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने न्यायालय के आदेशों की अवमानना के पहलू की भी जांच कराने की मांग उठाई है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि कानून सभी नागरिकों और संस्थाओं के लिए समान है तथा किसी भी व्यक्ति या विभाग को न्यायालय के आदेशों अथवा निर्धारित नियमों की अनदेखी करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की है।









