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विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं चलेगा: नए भवन में कक्षाएं शुरू कराने जयस का अल्टीमेटम

एडीटर: Chetram Rajpoot July 29, 2026

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– 500 छात्र जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर, कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

डिंडौरी न्यूज। जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) ने शासकीय महाविद्यालय करंजिया के नवीन भवन में शीघ्र शैक्षणिक गतिविधियां प्रारंभ कराने की मांग को लेकर बुधवार को कलेक्टर डिंडौरी को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने आरोप लगाया कि महाविद्यालय का नया भवन पूरी तरह तैयार होने के बावजूद अब तक उसमें कक्षाओं का संचालन शुरू नहीं किया गया है, जिससे सैकड़ों विद्यार्थियों को जर्जर भवन में पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

जयस द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि वर्तमान में लगभग 500 विद्यार्थी पुराने एवं जर्जर भवन में अध्ययन कर रहे हैं। भवन की स्थिति अत्यंत खराब होने के कारण विद्यार्थियों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से वर्षा ऋतु में कक्षाओं में पानी भर जाने से पढ़ाई प्रभावित होती है, वहीं भवन की जर्जर अवस्था विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बनी हुई है।

जयस के प्रदेश अध्यक्ष इंद्रपाल मरकाम ने कहा कि जब महाविद्यालय का नवीन भवन पूरी तरह तैयार है, तब भी उसमें कक्षाओं का संचालन नहीं होना विद्यार्थियों के हितों की अनदेखी है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की कि छात्र-छात्राओं की सुरक्षा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक वातावरण को ध्यान में रखते हुए नए भवन में तत्काल कक्षाओं का संचालन प्रारंभ कराया जाए।

उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन द्वारा शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो जयस विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की समस्त जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

ज्ञापन जयस जिला अध्यक्ष नागेंद्र धुर्वे के नेतृत्व में कलेक्टर को सौंपा गया। इस दौरान संभागीय उपाध्यक्ष जिया पंद्राम, संगठन मंत्री डिगम्बर सिंह पट्टा सहित संगठन के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

जयस ने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन विद्यार्थियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र आवश्यक निर्णय करेगा, जिससे नए भवन में अध्ययन प्रारंभ हो सके और छात्रों को सुरक्षित एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध हो सके।

एडीटर

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत ‘मध्यभूमि के बोल’ के संपादक हैं और दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के खुलासे और जमीनी खोजी पत्रकारिता के लिए उनकी पहचान है।...

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