– नर्मदा संरक्षण का लिया संकल्प
डिंडौरी न्यूज । स्वर्गीय अनिल माधव दवे के पुण्य स्मरण में डिंडोरी स्थित शंकर घाट पर “नदी संवाद एवं संगोष्ठी” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में नर्मदा संरक्षण, जल संवर्धन और नदी संस्कृति को बचाने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने अनिल माधव दवे के विचारों को याद करते हुए नदी संरक्षण को समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बताया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित श्री महेश जी ने कहा कि वही कार्य महत्त्वपूर्ण होता है जो परिणाम तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन के लिए भोजन जितना आवश्यक है, उतना ही पानी भी आवश्यक है। पृथ्वी पर जब से मनुष्य आया है, तब से पानी भी उसके जीवन का आधार रहा है और दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य स्वस्थ और निरंतर विकास करने वाला जीवन चाहता है, तो पानी को भी स्वस्थ रखना होगा। केवल मनुष्य के स्वास्थ्य की चिंता कर पानी को प्रदूषित छोड़ देना संभव नहीं है। जितना स्वस्थ मनुष्य चाहिए, उतना ही स्वस्थ जल भी आवश्यक है। इसलिए पानी को स्वस्थ बनाए रखने की जिम्मेदारी मनुष्य की है, क्योंकि पानी ही हमें स्वस्थ रखने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि यह बात जितनी जल्दी समाज समझेगा, उतनी जल्दी सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
कार्यक्रम में नर्मदा समग्र के संभागीय सदस्य श्री सुधीर दत्त तिवारी ने कहा कि अनिल माधव दवे ने डिंडोरी में चौपाल लगाकर नर्मदा में मिल रहे नालों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की थी। उनकी प्रेरणा से लगातार प्रयास किए गए और आज स्थिति यह है कि नर्मदा में कोई नाला नहीं मिल रहा है। उन्होंने बताया कि वे प्रतिदिन नर्मदा तट जाते हैं, लेकिन कुछ भी अर्पित नहीं करते, क्योंकि अनिल जी ने केवल माँ नर्मदा के दर्शन करने और नदी में एक चावल का दाना तक न डालने की सीख दी थी।
श्री राजू बर्मन ने बताया कि नदी महोत्सव में अनिल माधव दवे का वक्तव्य सुनने के बाद उन्हें नदी संरक्षण के लिए कार्य करने की प्रेरणा मिली। इसी प्रेरणा से उन्होंने साथियों के सहयोग से नर्मदा तट पर 108 पीपल और बरगद के पौधे लगाए।
वहीं श्री रत्नेश जी ने कहा कि प्रथम नदी महोत्सव में अनिल माधव दवे का चिंतन सुनकर उनकी नदी के प्रति सोच पूरी तरह बदल गई थी। उन्होंने कहा कि उस समय जिन संकटों की बात की गई थी, वे आज स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। इसलिए केवल सफाई अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को गंदगी फैलाने से रोकना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नर्मदा को प्रदूषित होने से बचाना ही अनिल माधव दवे को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कार्यक्रम में श्री धर्मेंद्र जी ने सहायक नदियों के संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि माँ नर्मदा अपने सहायक नदियों के जल से ही परिपूर्ण रहती हैं। यही सहायक नदियाँ नर्मदा का वास्तविक श्रृंगार हैं, इसलिए इन पर कार्य करना अत्यंत आवश्यक है। संगोष्ठी में उपस्थित लोगों ने नर्मदा और अन्य नदियों को स्वच्छ एवं अविरल बनाए रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन और जनजागरूकता को लेकर भी विचार साझा किए गए।












