Dindori News, डिंडौरी न्यूज। शिक्षकों की वरिष्ठता, टीईटी परीक्षा और नियुक्ति दिनांक को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब उग्र रूप लेता जा रहा है। जिले के शिक्षक अब अपनी मांगों को लेकर खुलकर सामने आ गए हैं और सड़क से लेकर संसद व न्यायालय तक संघर्ष का ऐलान कर दिया है।
बताया जा रहा है कि वर्ष 1998-99 से अल्प वेतन पर सेवा दे रहे कई शिक्षक आज भी अपनी समस्याओं से जूझ रहे हैं। प्रारंभिक वर्षों में बिना जीपीएफ के कार्य करने वाले इन शिक्षकों को वर्तमान में मात्र 2 से 3 हजार रुपए पेंशन एनपीएस के तहत मिल रही है, जो उनके जीवन-यापन के लिए अपर्याप्त है। ऐसे में अब उन्हें टीईटी परीक्षा देने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जिससे शिक्षकों में भारी आक्रोश है।
शिक्षकों का कहना है कि 25-30 वर्षों की निरंतर सेवा के बावजूद उनकी वरिष्ठता समाप्त कर 1 जुलाई 2018 से नई नियुक्ति मान ली गई है, जिससे उनके अधिकारों पर सीधा असर पड़ा है। वहीं 50 से 55 वर्ष की आयु में टीईटी परीक्षा में शामिल होने की अनिवार्यता और परीक्षा उत्तीर्ण न करने पर सेवा समाप्त करने के आदेश ने शिक्षकों की चिंता और बढ़ा दी है।
इस मुद्दे को लेकर शिक्षक संयुक्त मोर्चा के प्रांतीय आह्वान पर डिंडौरी जिले के दीदी कैफे में विभिन्न शिक्षक संगठनों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सभी संगठनों ने एकजुटता का परिचय देते हुए संयुक्त मोर्चा का गठन किया और आंदोलन को तेज करने का निर्णय लिया।
बैठक में सर्वसम्मति से यह तय किया गया कि आगामी 8 अप्रैल को जिले में ‘शिक्षक सम्मान बचाओ अनुरोध रैली’ आयोजित की जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
बैठक में प्रमुख रूप से शिक्षक संघ, आजाद शिक्षक संघ, प्रांतीय शिक्षक संघ, ट्रायबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी उपस्थित रहे। इनमें महेंद्र सिंह उद्दे, देवेंद्र दीक्षित, सनत तिवारी, तरुण कुमार ठाकुर, द्वारका मरावी, सुशील नागेश्वर, आनंद उइके, लल्लू परस्ते, रामकुमार चंदेल, मधु दीप उपाध्याय, जीवन मरावी, इकलाख हुसैन, श्रीमती दीपमाला गुप्ता, कमल सिंह गौतम और कुम्हरा लाल नंदा सहित अन्य शिक्षक शामिल थे।
शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।












