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दो डीएड डिप्लोमा में एक ही शिक्षक की फोटो! जांच में फर्जी निकले प्रमाणपत्र, डिंडौरी में मचा हड़कंप

akvlive.in

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डिंडौरी न्यूज । जिले में फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सहारे शासकीय सेवा और पदोन्नति प्राप्त करने का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। ग्राम कुकर्रामठ निवासी लोक सिंह दुर्वासा ने जनसुनवाई में कलेक्टर डिंडौरी को शिकायत सौंपकर दो शिक्षकों पर फर्जी डीएड अंकसूची और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर नौकरी एवं आर्थिक लाभ लेने का गंभीर आरोप लगाया है।

शिकायत में तामेश्वर दास सुरेश्वर एवं सेवानिवृत्त शिक्षक तिलक सिंह तिलगाम के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज कर वेतन एवं अन्य शासकीय लाभों की वसूली की मांग की गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार दोनों शिक्षकों की अंकसूचियों में एक जैसे फोटो और समान अंक दर्ज पाए गए हैं, जिससे दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

– आरटीआई में खुलासा, डाइट मंडला ने प्रमाणपत्र जारी करने से किया इंकार

मामले का खुलासा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त जानकारी से हुआ। शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार संबंधित शिक्षकों ने जो डीएड डिप्लोमा प्रस्तुत किए हैं, उनमें परीक्षा केंद्र और प्रमाणपत्र जारी करने वाली संस्था के रूप में “गवर्नमेंट डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट मंडला” का उल्लेख किया गया है।

जब उक्त रोल नंबरों और अंकसूचियों की जानकारी डाइट मंडला से मांगी गई तो संस्था ने लिखित रूप से स्पष्ट किया कि संबंधित रोल नंबरों के परीक्षार्थी न तो परीक्षा में शामिल हुए थे और न ही संबंधित अंकसूचियां संस्थान से जारी की गई थीं।

जांच में फर्जी पाए गए डीएड डिप्लोमा

प्राचार्य, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान मंडला द्वारा 14 फरवरी 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी डिंडौरी को भेजे गए पत्र में बताया गया कि तामेश्वर दास सुरेश्वर की डीएड द्वितीय वर्ष 2006 परीक्षा अनुक्रमांक 3475535 की जांच की गई, जिसमें पाया गया कि संबंधित परीक्षार्थी वर्ष 2006 की परीक्षा में सम्मिलित ही नहीं हुआ था और न ही उसकी अंकसूची संस्थान द्वारा जारी की गई। इसी प्रकार सेवानिवृत्त शिक्षक तिलक सिंह तिलगाम के डीएड द्वितीय वर्ष 2010 पत्राचार अनुक्रमांक 5681182 की जांच में भी यह तथ्य सामने आया कि संबंधित परीक्षार्थी वर्ष 2010 की परीक्षा में शामिल नहीं हुआ था तथा उक्त अंकसूची भी संस्थान द्वारा जारी नहीं की गई।

– वर्षों तक उठाते रहे वेतन वृद्धि और पदोन्नति का लाभ

शिकायतकर्ता लोक सिंह दुर्वासा का आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दोनों शिक्षकों ने वर्षों तक शासकीय सेवा में पदोन्नति, वेतनवृद्धि, एरियर्स और अन्य आर्थिक लाभ प्राप्त किए, जिससे शासन को लाखों रुपये की आर्थिक क्षति हुई। साथ ही वास्तविक पात्र कर्मचारियों के अधिकार भी प्रभावित हुए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने पर उन्हें जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। शिकायतकर्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित शिक्षकों के साथ-साथ उस समय के जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की मांग की है।

– एफआईआर और वसूली की मांग

लोक सिंह दुर्वासा ने प्रशासन से मांग की है कि मामले में धोखाधड़ी, कूटरचना और शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की जाए तथा अब तक प्राप्त वेतन और अन्य शासकीय लाभों की वसूली सुनिश्चित की जाए। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासनिक महकमे में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..