भोपाल। डिप्टी सीएम एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के नेतृत्व में वित्त विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए बजट व्यय की नई व्यवस्था लागू कर दी है। जारी दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि अब बजट का उपयोग पूरी पारदर्शिता, मितव्ययता और सख्त वित्तीय अनुशासन के तहत किया जाएगा। सभी विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे स्वीकृत राशि का उपयोग निर्धारित नियमों और त्रैमासिक सीमाओं के अनुसार ही करें।
वित्त विभाग के अनुसार मध्यप्रदेश विनियोग (क्रमांक-2) अधिनियम, 2026 के तहत सभी विभागों को उनकी मांग के अनुरूप 100 प्रतिशत बजट आवंटन जारी कर दिया गया है। हालांकि, इस राशि के उपयोग में नियंत्रण बनाए रखने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान लागू किए गए हैं।
नई योजनाओं पर खर्च के लिए अब सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य कर दी गई है। अपरीक्षित मद में शामिल योजनाओं पर बिना अनुमोदन के कोई व्यय नहीं किया जा सकेगा। अनुमोदन मिलने के बाद ही संबंधित विभाग वित्त विभाग को सूचना देकर खर्च कर सकेगा।
व्यय को तीन श्रेणियों—मुक्त, केंद्र प्रवर्तित और सामान्य—में विभाजित किया गया है। मुक्त श्रेणी में वेतन-भत्ते, मजदूरी, छात्रवृत्ति, न्यायालयीन भुगतान, आपदा राहत और ऋण अदायगी जैसे आवश्यक खर्च शामिल हैं, जिन पर त्रैमासिक सीमा लागू नहीं होगी। वहीं केंद्र प्रवर्तित योजनाओं को भी इस सीमा से मुक्त रखा गया है।
सामान्य श्रेणी के व्ययों पर त्रैमासिक सीमा लागू की गई है। बजट नियंत्रण अधिकारी द्वारा यह सीमा तय की जाएगी, अन्यथा स्वतः प्रत्येक तिमाही में 25 प्रतिशत खर्च की सीमा प्रभावी हो जाएगी। इससे अनियंत्रित व्यय पर अंकुश लगेगा।
अनुपूरक बजट जारी होने पर 15 दिनों के भीतर नई व्यय सीमा तय करना अनिवार्य होगा। साथ ही, पुनर्विनियोजन की स्थिति में व्यय सीमा स्वतः समायोजित हो जाएगी। किसी त्रैमास की बची हुई राशि को अगले त्रैमास में खर्च करने के लिए वित्त विभाग की अनुमति लेना जरूरी होगा।
वित्त विभाग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि विभाग पहले लंबित दायित्वों का निराकरण करें और उसके बाद ही नए कार्यों पर व्यय करें। बजट से अधिक नए दायित्व बनाने पर रोक लगाई गई है।
केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के तहत प्राप्त राशि को समय पर सिंगल नोडल एजेंसी (SNA) खातों में स्थानांतरित करना अनिवार्य किया गया है। देरी होने पर संबंधित विभाग की जवाबदेही तय होगी।
इसके अलावा, सार्वजनिक उपक्रमों और निगमों को अपने वित्तीय लेख समय पर अंतिम रूप देने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समय सीमा का पालन न करने पर उन्हें राज्य बजट से राशि जारी नहीं की जाएगी। साथ ही, लाभांश राशि को भी वित्तीय वर्ष में ही राज्य कोष में जमा करना अनिवार्य किया गया है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन योजनाओं में बजट बचत की संभावना है, वहां विभाग 31 दिसंबर 2026 तक व्यय की समीक्षा कर 15 जनवरी 2027 से पहले बची राशि समर्पित करें, ताकि अन्य विभागों की आवश्यकताओं की पूर्ति की जा सके।












