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अगर थान सिंह नहीं पहुंचते तो चली जाती मासूम की जान : खुले बोरवेल ने फिर खोली सिस्टम की पोल

akvlive.in

Published

– खुले बोरवेल में गिरा 8 वर्षीय मासूम, ग्रामीण की सूझबूझ से बची जान

डिंडौरी। मध्यप्रदेश में खुले बोरवेल को लेकर सख्त नियम और सुरक्षा गाइडलाइन लागू होने के बावजूद हादसे लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला डिंडौरी जिले के झनकी गांव से सामने आया है, जहां एक खुला सूखा बोरवेल आठ वर्षीय मासूम शिवम पंद्राम की जिंदगी पर भारी पड़ते-पड़ते बच गया। करीब साढ़े पांच घंटे तक मासूम बोरवेल के अंदर जिंदगी और मौत से जूझता रहा। गनीमत रही कि एक ग्रामीण की सतर्कता और साहस से समय रहते उसकी जान बचा ली गई।

जानकारी के अनुसार शनिवार सुबह करीब 10 बजे शिवम गांव में खेलते-खेलते अचानक खुले पड़े सूखे बोरवेल में जा गिरा। घटना के समय आसपास कोई मौजूद नहीं था, जिससे बच्चे की आवाज किसी तक नहीं पहुंच सकी। मासूम बोरवेल के अंदर फंसा रोता-बिलखता रहा और बाहर मदद के लिए कोई नहीं था।

इसी दौरान गांव से गुजर रहे ग्रामीण थान सिंह की साइकिल अचानक खराब हो गई। जब वह साइकिल ठीक करने के लिए रुके, तभी उन्हें पास के बोरवेल से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। पहले तो उन्हें कुछ समझ नहीं आया, लेकिन जब उन्होंने ध्यान से देखा तो मासूम शिवम बोरवेल के अंदर फंसा दिखाई दिया। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए थान सिंह ने बिना समय गंवाए बच्चे को बाहर निकालने की कोशिश शुरू कर दी।

करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत और साहसिक प्रयास के बाद ग्रामीण ने शिवम को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बच्चे को बाहर आते देख परिजनों और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। घटना के बाद गांव में दहशत और आक्रोश का माहौल है।

बताया जा रहा है कि उक्त बोरवेल वर्ष 2023 में नलजल योजना के तहत खोदा गया था। पानी नहीं मिलने पर इसे अनुपयोगी मानकर बंद कर दिया गया था। लेकिन सवाल यह खड़ा हो रहा है कि यदि बोरवेल को नियमानुसार बंद किया गया था, तो हादसे वाले दिन वह खुला कैसे मिला? क्या संबंधित विभाग ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी की या फिर जिम्मेदारों की लापरवाही से मासूम की जान खतरे में पड़ गई?

ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में कई सूखे और अनुपयोगी बोरवेल खुले पड़े हुए हैं, जिन पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। घटना के बाद लोगों ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

वहीं पीएचई विभाग ने मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की बात कही है। हालांकि बड़ा सवाल अब भी कायम है कि आखिर प्रशासन और संबंधित विभाग कब जागेंगे, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..