अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस पर सब जेल देपालपुर में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित, बंदियों को आत्मसुधार और नई शुरुआत का संदेश
देपालपुर(इंदौर)। अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस के अवसर पर सब जेल देपालपुर में तहसील विधिक सेवा समिति के तत्वावधान में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में तहसील विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष एवं जिला न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
जिला न्यायाधीश श्री खान ने बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि परिवार केवल रिश्तों का समूह नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, धैर्य और अपनत्व की वह मजबूत डोर है, जो व्यक्ति को जीवन के कठिन दौर में भी संभालकर रखती है। उन्होंने कहा कि जीवन में गलतियां हर व्यक्ति से होती हैं, लेकिन वही व्यक्ति महान बनता है जो अपनी भूलों से सीख लेकर स्वयं को बदलने का प्रयास करता है।
उन्होंने बंदियों से कहा कि जेल का समय निराशा का नहीं, बल्कि आत्ममंथन, आत्मसुधार और भविष्य निर्माण का अवसर है। यदि व्यक्ति सकारात्मक सोच, अनुशासन और शिक्षा को अपनाए, तो वह समाज में सम्मानपूर्वक पुनः स्थापित हो सकता है।
जिला न्यायाधीश श्री खान ने कहा कि माता-पिता की दुआएँ, जीवनसाथी का विश्वास और बच्चों की उम्मीदें व्यक्ति को नई राह दिखाती हैं। उन्होंने बंदियों से परिवार के विश्वास को बनाए रखने और रिहाई के बाद कानून का सम्मान करते हुए जिम्मेदार नागरिक के रूप में जीवन जीने का आह्वान किया।

उन्होंने यह भी कहा कि न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि व्यक्ति को सुधार और पुनर्वास का अवसर प्रदान करना भी है। यदि किसी व्यक्ति में बदलाव की सच्ची इच्छा हो, तो समाज भी उसे स्वीकार करने में पीछे नहीं हटता।
कार्यक्रम में सीनियर सिविल जज रिजवाना कौसर सुमित्रा ताहेड, दिव्या श्रीवास्तव, सहायक जेल अधीक्षक आर.एस. कुशवाह, प्रहरी संतोष देवलिया, विवेक शर्मा, भेरम सिंह धाकड़, मनोज कुशवाह, महिला प्रहरी एकता पटेल, निर्मला मोरी, नर्स शिवानी श्रीवास्तव, नायब नाज़िर दिलीप यादव सहित जेल स्टाफ एवं बंदीगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में बंदियों ने आत्मसुधार, परिवार के विश्वास को बनाए रखने तथा समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक लौटने का संकल्प लिया। यह आयोजन बंदियों के भीतर आशा, आत्मविश्वास और सकारात्मक परिवर्तन की भावना जागृत करने वाला सिद्ध हुआ।












