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झूठे दुष्कर्म व एससी-एसटी केस पर कोर्ट का फैसला: महिला को 10 साल की कठोर सजा, 10,500 जुर्माना

akvlive.in

Published

– महिला को 10 साल की सजा, न्यायालय ने जताई गहरी चिंता

मध्यप्रदेश के दतिया जिले की चर्चित झूठी दुष्कर्म कांड में न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए कानून का मजाक और न्याय व्यवस्था के दुरुपयोग पर सख्त संदेश देते हुए दतिया के अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने एक अहम फैसले में दुष्कर्म और एससी-एसटी एक्ट के तहत झूठा मामला दर्ज कराने वाली महिला को 10 वर्ष के कठोर कारावास और ₹10,500 के अर्थदंड से दंडित किया है।

 यह फैसला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश श्री राजेश भंडारी की अदालत ने वैभवी सनोरिया प्रकरण में सुनाया, जिसे न्यायिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।

न्यायालय ने अपने निर्णय में तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में झूठे मामलों की बढ़ती प्रवृत्ति न्याय प्रणाली के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे प्रकरण न केवल निर्दोष व्यक्तियों को अनावश्यक उत्पीड़न का शिकार बनाते हैं, बल्कि पूरे न्याय तंत्र की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करते हैं। न्यायालय ने कहा— “ऐसे मामलों से न केवल न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि आम लोगों के बीच न्याय व्यवस्था के प्रति अविश्वास भी बढ़ता है।”

– यह है पूरा मामला

प्रकरण के अनुसार, वैभवी सनोरिया ने थाना बड़ौनी में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि 22 सितंबर 2021 की रात उसका पड़ोसी कालीचरण उसके घर में घुस आया और उसके साथ दुष्कर्म किया। शिकायत में जान से मारने की धमकी देने का भी उल्लेख किया गया था। गंभीर आरोपों को देखते हुए पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर जांच प्रारंभ की और साक्ष्य संकलित कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।

– विचारण के दौरान बदला घटनाक्रम

मामले की सुनवाई के दौरान स्थिति तब पूरी तरह बदल गई, जब फरियादिया अपने ही आरोपों से मुकर गई। अदालत में दिए गए बयान में उसने स्वीकार किया कि रुपए के लेनदेन के विवाद के चलते उसने कालीचरण के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराया था। इस स्वीकारोक्ति के बाद पूरे प्रकरण की दिशा बदल गई।

न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और बयान के आधार पर आरोपित कालीचरण को दोषमुक्त कर दिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि मामला निराधार था।

– फरियादिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई

अदालत ने इस गंभीर कृत्य को न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग के रूप में देखते हुए तत्काल संज्ञान लिया और फरियादिया के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश दिए। न्यायालय के निर्देश के बाद वैभवी सनोरिया के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराने के संबंध में नया प्रकरण कायम किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए और पांच गवाहों के बयान दर्ज कराए, जिनके आधार पर अदालत ने महिला को दोषी पाया।

– इन धाराओं में हुई सजा

अदालत ने वैभवी सनोरिया को भारतीय दंड संहिता की धारा 182 (झूठी सूचना देना), धारा 195 (झूठे साक्ष्य से संबंधित अपराध) एवं धारा 211 (झूठा आपराधिक आरोप लगाना) के तहत दोषी ठहराया। सभी तथ्यों और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने कठोर दंड सुनाते हुए 10 वर्ष के कारावास एवं आर्थिक दंड का आदेश दिया।

प्रकरण में शासन की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक अरुण कुमार लिटोरिया ने मजबूत पैरवी की। उन्होंने साक्ष्यों और गवाहों के माध्यम से यह साबित किया कि मामला पूरी तरह से मनगढ़ंत था, जिससे अदालत को निष्कर्ष तक पहुंचने में मदद मिली।

– समाज और न्याय व्यवस्था के लिए संदेश

यह निर्णय उन लोगों के लिए कड़ा संदेश है, जो व्यक्तिगत विवाद या स्वार्थ के चलते गंभीर अपराधों में झूठे आरोप लगाकर कानून का दुरुपयोग करते हैं। अदालत ने संकेत दिया कि इस तरह के मामलों में कठोर कार्रवाई की जाएगी ताकि न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा और विश्वसनीयता बनी रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से एक ओर जहां निर्दोष व्यक्तियों को न्याय मिलने का विश्वास मजबूत होगा, वहीं दूसरी ओर झूठे मामलों पर अंकुश लगाने में भी मदद मिलेगी।

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..

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चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..

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