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आदिवासी जिले में शासकीय लॉ कॉलेज को जल्द मिल सकती है मान्यता, बीसीआई ने किया सर्वे

akvlive.in

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जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) की लंबे समय से की जा रही मांग अब रंग लाती नजर आ रही है। जिले में शासकीय लॉ कॉलेज की स्थापना और मान्यता को लेकर लगातार किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) द्वारा कॉलेज का सर्वे पूरा कर लिया गया है तथा मान्यता के लिए आवश्यक शुल्क भी जमा करा दिया गया है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि कॉलेज को शीघ्र ही आधिकारिक मान्यता मिल सकती है।

प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में आयोजित बैठक के दौरान प्राचार्य ने जानकारी दी कि शासकीय लॉ कॉलेज के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। साथ ही भवन निर्माण के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार कर बजट स्वीकृति हेतु वित्त विभाग को भेज दिया गया है।

अधिवक्ता सम्यक जैन ने बताया कि वे जल्द ही मनन मिश्रा, चेयरमैन बार काउंसिल ऑफ इंडिया से संपर्क कर कॉलेज की मान्यता प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण कराने का आग्रह करेंगे।

वहीं, शासकीय विधि महाविद्यालय डिंडोरी के प्रभारी प्राचार्य विकास कुमार सिंह ने भी बार काउंसिल ऑफ इंडिया को मान्यता प्रदान करने के लिए पत्र भेजा है, ताकि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ की जा सके।

जयस के प्रदेश अध्यक्ष इन्द्रपाल मरकाम ने कहा कि जिले को 53 वर्षों बाद शासकीय लॉ कॉलेज की सौगात मिलने जा रही है। उन्होंने कहा कि यह जयस के निरंतर और सार्थक प्रयासों का परिणाम है। संगठन ने लंबे समय से इस मांग को प्रमुखता से उठाया, जिसका लाभ अब पूरे क्षेत्र के युवाओं और आमजन को मिलेगा।

उन्होंने कहा कि कॉलेज की स्थापना से आदिवासी अंचल में विधि शिक्षा को नया आयाम मिलेगा। स्थानीय विद्यार्थियों को अपने ही जिले में कानून की पढ़ाई का अवसर मिलेगा, वहीं आमजन अपने अधिकारों और कानून की जानकारी प्राप्त कर अधिक जागरूक बन सकेंगे।
बैठक में प्राचार्य, सह प्राध्यापक डॉ. पी. सी. उइके, प्रभारी प्राचार्य विधि महाविद्यालय विकास कुमार सिंह, जयस के प्रदेश अध्यक्ष इन्द्रपाल मरकाम, कार्यकारी अध्यक्ष राजकुमार नेटी, संभागीय उपाध्यक्ष जिया पन्द्रम, सचिव अजित पट्टा तथा एडवोकेट सम्यक जैन, पत्रकार चेतराम राजपूत उपस्थित रहे।

स्थानीय लोगों और छात्रों में इस खबर को लेकर उत्साह का माहौल है। सभी को उम्मीद है कि जल्द ही जिले को एक मान्यता प्राप्त शासकीय लॉ कॉलेज की सौगात मिलेगी, जो शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..