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न छत, न दीवार..सिर्फ नारों की पुकार: डिंडौरी में झोपड़ी की छांव में ‘सब पढ़े-सब बढ़े’ का दम तोड़ता अभियान

रिपोर्ट: Chetram Rajpoot April 8, 2026

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डिंडौरी न्यूज । एक तरफ सर्व शिक्षा अभियान के तहत सब पढ़े,सब बढ़े का नारा जोर शोर से लगाया जा रहा है वहीं दूसरी और जिले में कई स्कूल भवन विहीन है जो झोपड़ी या किसी ग्रामीण के घर में संचालित हो रहे हैं। शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य और केंद्र सरकार द्वारा तमाम तरह के लुभावने योजनाएं संचालित किया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को बैठने के लिए छत तक नसीब नहीं हो पा रहा है।

कुछ ऐसा ही जिले के समनापुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम भालापुरी की बसाहट शिकारीटोला में शिक्षा व्यवस्था बदहाल नजर आ रही है। यहां संचालित शासकीय प्राथमिक शाला का भवन शासन के निर्देशानुसार डिस्मेंटल कर दिया गया, लेकिन अब तक नया भवन स्वीकृत नहीं होने से स्कूली बच्चे पिछले दो वर्षों से झोपड़ी की छप्पर के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

जन सुनवाई में पहले पहुंचे ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल भवन हटाए जाने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर पालकों ने आपसी सहयोग से अस्थायी छप्पर बनाकर पढ़ाई शुरू कराई है। वर्तमान में भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच बच्चे उसी छप्पर के नीचे बैठकर अध्ययन कर रहे हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। वहीं आगामी बारिश के मौसम को लेकर भी अभिभावकों में चिंता बनी हुई है।

ग्रामीणों का कहना है कि भवन डिस्मेंटल करने से पहले नए भवन की स्वीकृति मिलनी चाहिए थी, ताकि तत्काल निर्माण कार्य शुरू हो सके। लेकिन अब तक न तो भवन स्वीकृति की जानकारी है और न ही निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ है। इससे बच्चों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।

विद्यालय में 50 से अधिक बच्चों का नामांकन है। ऐसी स्थिति में किसी भी अप्रिय घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि कोई हादसा होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

समस्त ग्रामवासियों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि शिकारीटोला स्थित प्राथमिक शाला के लिए शीघ्र नया भवन स्वीकृत कर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके और उनका भविष्य संवर सके।

एडीटर

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत ‘मध्यभूमि के बोल’ के संपादक हैं और दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के खुलासे और जमीनी खोजी पत्रकारिता के लिए उनकी पहचान है।...

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