डिंडौरी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत कार्यरत संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान कर दिया है। प्रदेश कार्यकारिणी के आह्वान पर मध्यप्रदेश के लगभग 32 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी 25 मई 2026 से आंदोलन की शुरुआत करेंगे।
जिला डिंडौरी सहित पूरे प्रदेश के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा है कि वर्षों से स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण योजनाओं और राष्ट्रीय कार्यक्रमों को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाने के बावजूद उनकी मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है।
संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ जिला डिंडौरी के अध्यक्ष ओमप्रकाश उरैती ने बताया कि वर्ष 2023 की संविदा नीति और 30 जनवरी 2026 को नियमितीकरण को लेकर की गई घोषणाओं को अब तक लागू नहीं किया गया है, जिससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। उन्होंने कहा कि संविदा कर्मचारी प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के प्रति गंभीर नजर नहीं आ रही।
संघ के अनुसार आंदोलन की शुरुआत 25 मई से 27 मई 2026 तक काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन के साथ की जाएगी। इसके बाद 28 एवं 29 मई को कलेक्टर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक तथा बीएमओ को ज्ञापन सौंपा जाएगा। वहीं 30 मई से 1 जून तक सांसद, विधायक एवं मंत्रियों सहित जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन देकर अपनी मांगों से अवगत कराया जाएगा।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 2 जून 2026 तक सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई तो प्रदेशभर के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी ऑफलाइन एवं ऑनलाइन कार्य पूरी तरह बंद कर अनिश्चितकालीन आंदोलन पर चले जाएंगे। इसके बाद भी मांगें नहीं मानी गईं तो मुख्यमंत्री निवास के घेराव की रणनीति बनाई जाएगी।

संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में एनपीएस और स्वास्थ्य बीमा का लाभ, अन्य राज्यों की तर्ज पर 10 प्रतिशत वेतन वृद्धि, नियमित कर्मचारियों की तरह महंगाई भत्ता, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) के वेतन में पीबीआई का समायोजन, ग्रेड पे निर्धारण में सुधार तथा नियमित कर्मचारियों के समान अवकाश सुविधा शामिल है। इसके अलावा “समान कार्य-समान वेतन” की नीति लागू होने तक सार्थक एप में उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था बंद करने और नियमितीकरण की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई है।
संघ का कहना है कि सरकार यदि जल्द समाधान नहीं निकालती है तो इसका असर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ सकता है, क्योंकि बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं









