– शिकायत वापस लेने के लिए दबाव और जान से मारने की धमकी का भी आरोप
– भवन निर्माण की राशि को लेकर बुलाई गई थी बैठक, शिक्षक ने लगाए गंभीर आरोप; पुलिस ने BNS की चार धाराओं में दर्ज किया प्रकरण
अनूपपुर | अनूपपुर के संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन से सामने आए एक कथित मारपीट और प्रताड़ना के मामले ने प्रशासनिक महकमे में हलचल पैदा कर दी है। जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) संजय कुमार मिश्रा के खिलाफ एक प्राथमिक शिक्षक ने कलेक्ट्रेट के भीतर कमरे में रोककर मारपीट करने, अभद्रता करने, महत्वपूर्ण दस्तावेज और मोबाइल छीनने, शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाने तथा जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। शिक्षक की शिकायत पर कोतवाली पुलिस अनूपपुर ने डीपीसी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

– भवन निर्माण की शेष राशि को लेकर हुई थी बैठक
पुलिस के मुताबिक पूरा घटनाक्रम 12 अगस्त 2026 का है। शिकायतकर्ता इन्द्रसिंह राजपूत, पिता स्व. प्रताप सिंह राजपूत, प्राथमिक पाठशाला पालाडिगवार में शिक्षक हैं और गाड़ासरई, जिला डिंडौरी के निवासी बताए गए हैं। शिक्षक ने ऑनलाइन/ई-एफआईआर के माध्यम से पुलिस को दी शिकायत में बताया कि संयुक्त कलेक्ट्रेट भवन के कक्ष क्रमांक 80 में उन शिक्षकों की बैठक बुलाई गई थी, जिन्होंने भवन निर्माण की शेष राशि के भुगतान को लेकर शिकायतें की थीं। बैठक के दौरान अन्य शिक्षकों को एक दिन का समय देकर वहां से जाने के लिए कहा गया।

– कमरे का दरवाजा बंद कर मारपीट का आरोप
शिकायत के अनुसार, जब शिक्षक इन्द्रसिंह राजपूत भी कमरे से बाहर निकलने लगे, तभी डीपीसी संजय कुमार मिश्रा ने कथित तौर पर उन्हें रोक लिया और कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया। शिक्षक का आरोप है कि इसके बाद उनके साथ अभद्रता की गई और अश्लील गालियां दी गईं। शिकायतकर्ता के मुताबिक, डीपीसी ने उनकी पीठ पर घूंसा मारा और जूते से दो-चार बार लात मारी। घटना के दौरान शिक्षक के साथ कथित रूप से दबाव और डर का माहौल बनाया गया।
– दस्तावेज और मोबाइल छीनने का भी आरोप
मामले को और गंभीर बनाते हुए शिक्षक ने आरोप लगाया कि उनके पास मौजूद भवन निर्माण से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज भी कथित तौर पर छीन लिए गए। इनमें पासबुक, लेजर, बिल-वाउचर, मांग पत्र की पावती और पेपर कटिंग सहित अन्य दस्तावेज शामिल बताए गए हैं।
शिकायत में यह भी आरोप है कि शिक्षक का मोबाइल फोन लेकर उन्हें मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 181 पर फोन करने के लिए मजबूर किया गया और दबाव बनाकर पूर्व में दर्ज शिकायत का निराकरण दर्ज करवाया गया।

– सादा कागज पर शिकायत वापस लेने का आवेदन लिखवाने का आरोप
पीड़ित शिक्षक ने पुलिस को बताया कि कथित तौर पर उन्हें सादा कागज दिया गया और शिकायत वापस लेने संबंधी आवेदन लिखने के लिए दबाव बनाया गया। इसके बाद वह आवेदन संबंधित बाबू के पास जमा करवाने की बात शिकायत में कही गई है।
शिक्षक का आरोप है कि उन्हें लगभग पौन घंटे तक कमरे में रोके रखा गया। इस दौरान उनके साथ मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ना की गई। शिकायत के मुताबिक, जाते समय उन्हें धमकी दी गई कि यदि उन्होंने घटना के बारे में किसी को बताया तो उन्हें जान से मरवा दिया जाएगा और मिट्टी में मिला दिया जाएगा।
– डर के कारण छह दिन बाद दर्ज कराई शिकायत
शिक्षक के मुताबिक घटना के बाद वह बेहद भयभीत हो गए थे। घर पहुंचकर उन्होंने परिजनों और अन्य शिक्षकों को पूरी घटना की जानकारी दी। शिकायत में कहा गया है कि मानसिक भय के साथ सीने में दर्द होने के कारण वह तत्काल पुलिस के पास नहीं पहुंच सके। इसके बाद उन्होंने हिम्मत जुटाई और 18 अगस्त 2026 को थाना कोतवाली अनूपपुर में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज करते हुए जांच प्रारंभ कर दी है।
– BNS की चार धाराओं में दर्ज हुआ प्रकरण
कोतवाली पुलिस ने डीपीसी संजय कुमार मिश्रा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की निम्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है—
– धारा 127(2) — गलत तरीके से रोकने/बंधक बनाने से संबंधित प्रावधान।
– धारा 296(b) — अश्लील गाली-गलौज एवं भाषा के प्रयोग से संबंधित प्रावधान।
– धारा 115(2) — स्वेच्छा से चोट पहुंचाने से संबंधित प्रावधान।
– धारा 351(2) — आपराधिक धमकी से संबंधित प्रावधान।
मामले की जांच सहायक उप निरीक्षक सुरेंद्र सिंह को सौंपी गई है। पुलिस द्वारा घटना से जुड़े तथ्यों, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। विवेचना के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
– कलेक्ट्रेट जैसी जगह पर लगे आरोपों से उठे गंभीर सवाल
कलेक्ट्रेट परिसर प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। ऐसे स्थान पर एक शिक्षक द्वारा अधिकारी पर कमरे में बंद कर मारपीट, दबाव बनाकर शिकायत वापस करवाने और जान से मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए जाने से पूरे मामले की गंभीरता बढ़ गई है।












