– आर्थिक तंगी के बावजूद नहीं छोड़ा सपनों का साथ, 2024 में घर छोड़ बैंगलोर पहुंचे; छह महीने की कड़ी मेहनत के बाद बनाई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान
भोपाल/ टीकमगढ़। 12वीं में अपेक्षाकृत कम अंक आने पर रिश्तेदारों और परिचितों के ताने सुनने वाले टीकमगढ़ जिले के छोटे से कस्बे पलेरा निवासी प्रखर विश्वकर्मा ने अपनी मेहनत, जुनून और वैज्ञानिक सोच के दम पर सफलता की ऐसी कहानी लिखी है, जो युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। रक्षा तकनीक, एयरोस्पेस, रॉकेट्री और अंतरिक्ष विज्ञान में लगातार नए प्रयोग कर रहे प्रखर आज अपनी प्रतिभा के दम पर देश-विदेश में पहचान बना चुके हैं। कम उम्र में उनके प्रयोगों और उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें “मध्य प्रदेश का युवा मिसाइल मैन” तक कहा जाने लगा है। हालांकि प्रखर की यह सफलता किसी आसान रास्ते का परिणाम नहीं है। आर्थिक परेशानियां, परिवार की नाराजगी, कम अंकों को लेकर सुनने पड़े ताने और संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने अपने सपनों से समझौता नहीं किया।
– कम अंक आए तो परिवार को हुई निराशा
प्रखर ने प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव के आसपास के क्षेत्र में पूरी की। इसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए गवर्नमेंट मॉडल स्कूल, पलेरा में प्रवेश लिया। 12वीं का परिणाम आया तो अंक उनकी उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहे। कम प्रतिशत के कारण परिवार में निराशा का माहौल बन गया। परिवार चाहता था कि प्रखर जोखिम भरी राह छोड़कर बीए या बीएससी जैसी सामान्य पढ़ाई करें और भविष्य को सुरक्षित बनाएं। लेकिन प्रखर के मन में कुछ अलग करने का जुनून था। उनका सपना एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, रॉकेट, मिसाइल और अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में काम करने का था। उन्होंने तय कर लिया कि परिस्थितियां चाहे जितनी कठिन हों, वे इंजीनियरिंग और रिसर्च के क्षेत्र में ही अपना भविष्य बनाएंगे।
– 2024 में घर छोड़ा, बैंगलोर पहुंचकर शुरू की नई जंग
सपनों और परिस्थितियों के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच वर्ष 2024 में प्रखर ने घर छोड़ने का साहसिक निर्णय लिया। आर्थिक मदद का मजबूत सहारा नहीं था, लेकिन हौसला मजबूत था। वे देश की स्पेस और एयरोस्पेस गतिविधियों के प्रमुख केंद्र बैंगलोर पहुंचे।बैंगलोर में शुरुआती समय उनके लिए बेहद संघर्षपूर्ण रहा। सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने एक निजी एयरोस्पेस कंपनी में करीब छह महीने की इंटर्नशिप की। इस दौरान उन्होंने अपने तकनीकी ज्ञान को मजबूत करने के साथ-साथ देश में आयोजित विभिन्न एक्सपो, कॉन्फ्रेंस और वर्कशॉप में हिस्सा लिया।
इस दौरान इसरो सहित देश की प्रमुख अंतरिक्ष एवं खगोल विज्ञान संस्थाओं से जुड़े कार्यक्रमों में भागीदारी ने उनके ज्ञान और अनुभव को नई दिशा दी। लगातार सीखने और प्रयोग करने की इसी प्रवृत्ति ने प्रखर की प्रोफाइल को मजबूत किया और उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर मिलने लगे।

– बैंगलोर से लौटे तो सामने थी फीस की चुनौती
बैंगलोर में अपनी प्रोफाइल और अनुभव को मजबूत करने के बाद प्रखर भोपाल लौटे। अब उनके सामने इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू करने की चुनौती थी। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं होने के कारण उन्होंने निजी संस्थानों में प्रवेश के विकल्प तलाशे।
उन्होंने LNCT भोपाल, ओरिएंटल कॉलेज, पारुल यूनिवर्सिटी और आरएनटीयू सहित विभिन्न संस्थानों में जाकर अपने रिसर्च कार्य और उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी। उनकी प्रतिभा और उपलब्धियों को देखकर कई संस्थानों ने उन्हें 70 से 80 प्रतिशत तक फीस में छूट देने की पेशकश की।
लेकिन प्रखर को ऐसी मदद की आवश्यकता थी, जिससे आर्थिक चिंता पूरी तरह खत्म हो सके और वे अपना पूरा ध्यान पढ़ाई एवं रिसर्च पर लगा सकें।
– BIST ने उठाया पूरा खर्च, 100 प्रतिशत फीस की माफी
इसी तलाश में प्रखर बंसल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (BIST), भोपाल पहुंचे। संस्थान के प्रबंधन ने जब प्रखर के रिसर्च कार्य, उपलब्धियों और उनके जुनून के बारे में विस्तार से जाना तो वे प्रभावित हुए।
संस्थान ने प्रखर की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने का निर्णय लेते हुए उनकी पढ़ाई को 100 प्रतिशत निःशुल्क करने का फैसला किया। इसके साथ ही बस सुविधा और अन्य आवश्यक खर्चों की जिम्मेदारी भी संस्थान द्वारा उठाने का निर्णय लिया गया। इसके बाद प्रखर ने यहां से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की।
– एक साल बाद घर लौटे तो नाराजगी गर्व में बदल गई
अपने सपनों को साकार करने की जिद में प्रखर करीब एक वर्ष तक घर से दूर रहे। इस दौरान उन्होंने परिवार से अधिक अपने काम, रिसर्च और उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित किया। जब उनकी उपलब्धियां सामने आने लगीं और उनके काम की चर्चा क्षेत्र से बाहर तक पहुंची, तब प्रखर घर लौटे। बेटे की मेहनत, संघर्ष और उपलब्धियों को देखकर परिवार का नजरिया भी बदल गया। जिस कम अंक को लेकर कभी निराशा थी, वही परिवार आज प्रखर की उपलब्धियों पर गर्व महसूस कर रहा है।
– मिसाइल से लेकर अंतरिक्ष विज्ञान तक प्रयोग
प्रखर की पहचान केवल एक इंजीनियरिंग छात्र के रूप में नहीं है। वे रक्षा तकनीक, एयरोस्पेस और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े विभिन्न कॉन्सेप्ट और रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। प्रोजेक्ट राम (Project RAM) उनके चर्चित प्रोजेक्ट्स में शामिल है। यह रीयूजेबल मिसाइल प्रणाली से जुड़ा एक कॉन्सेप्ट है, जिसका उद्देश्य मिशन पूरा होने के बाद प्रणाली को सुरक्षित बेस पर वापस लाने की अवधारणा पर काम करना है।
इसके अलावा प्रखर ने एरो एक्स स्पेस टेक्नोलॉजी नाम से अपना एयरोस्पेस रिसर्च स्टार्टअप भी शुरू किया है, जिसके माध्यम से वे अंतरिक्ष एवं एयरोस्पेस तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं।
– अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंची प्रतिभा
प्रखर की उपलब्धियों का दायरा भारत तक सीमित नहीं है। वे अमेरिका में अमेरिकन फिजिकल सोसाइटी (APS) से जुड़े ग्लोबल फिजिक्स समिट में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वहीं नासा के “Scientist for a Day” कार्यक्रम के तहत यूरेनस के एक चंद्रमा से संबंधित शोधपत्र के लिए चयन भी उनकी उपलब्धियों में शामिल है।
वे छात्रों और युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान एवं रॉकेट्री के प्रति जागरूक करने के लिए स्पेस एजुकेशन से जुड़े कार्य भी कर रहे हैं। प्रखर के अनुसार, युवाओं में वैज्ञानिक सोच और प्रयोग करने की क्षमता को बढ़ावा देना भी उनके मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
– सम्मान भी मिले, लेकिन लक्ष्य अभी बाकी
प्रखर को उनके कार्यों के लिए इंटरनेशनल आइकॉन अवॉर्ड सहित राज्य स्तरीय गौरव सम्मान भी प्राप्त हुए हैं। कम उम्र में मिली इन उपलब्धियों के बावजूद प्रखर का कहना है कि यह उनकी यात्रा का अंत नहीं, बल्कि शुरुआत है। पलेरा जैसे छोटे कस्बे से निकलकर बैंगलोर की कठिन राह तय करने और आर्थिक चुनौतियों के बीच अपने लिए रास्ता बनाने वाले प्रखर विश्वकर्मा की कहानी यह संदेश देती है कि सफलता केवल अच्छे अंकों से तय नहीं होती। जुनून, मेहनत, सीखने की ललक और विपरीत परिस्थितियों से लड़ने का साहस हो तो छोटे शहर और सीमित संसाधन भी बड़े सपनों की राह नहीं रोक सकते।
आज प्रखर रक्षा और एयरोस्पेस तकनीक के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और उनका लक्ष्य भविष्य में देश की वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षमता को मजबूत करने वाले नवाचारों पर काम करना है।












