– डिंडौरी में पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल, सिर्फ आरोपी की गिरफ्तारी से नहीं खुलेगा अवैध शराब के नेटवर्क का राज
डिंडौरी। नर्मदा नदी के पांच किलोमीटर के दायरे में शराबबंदी के सरकारी निर्णय के बावजूद डिंडौरी में भारी मात्रा में शराब की बरामदगी ने प्रशासन और आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोतवाली पुलिस ने 16 अगस्त की शाम भोंदूटोला क्षेत्र में लक्ष्मी राठौर के किराये के मकान पर दबिश देकर 106.740 लीटर शराब एवं बियर, जिसकी कीमत 27,373 रुपये बताई गई है, बरामद की। मामले में जगदीश कांसकार उम्र 48 वर्ष को गिरफ्तार कर धारा 34(2) आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।
पुलिस के अनुसार मुखबिर की सूचना पर टीम ने मौके पर पहुंचकर मकान की तलाशी ली। आरोपी के कब्जे से बडवाइजर बियर, किंगफिशर स्ट्रांग बियर, ले माउंट 6000 बियर, 40 पाव प्लेन देशी मदिरा और 3 पाव एमडी व्हिस्की बरामद हुई। शराब को जब्त कर नमूने अलग किए गए और शेष माल को सीलबंद कर मालखाने में जमा कराया गया।
– लेकिन कार्रवाई के बाद उठ रहा सबसे बड़ा सवाल
पुलिस की कार्रवाई में शराब जब्त हो गई, आरोपी गिरफ्तार हो गया और प्रकरण भी दर्ज हो गया। लेकिन अब असली सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में शराब आखिर डिंडौरी पहुंची कहां से? यदि आरोपी के कथित बयान के अनुसार वह जबलपुर से शराब खरीदकर डिंडौरी लाकर बेचता था, तो पुलिस की जांच यहीं खत्म नहीं होनी चाहिए। यह पता लगाना जरूरी है कि वह शराब किस दुकान से खरीदता था, किसके माध्यम से खरीदता था और इतनी मात्रा में शराब खरीदने के बावजूद संबंधित दुकानों के रिकॉर्ड में क्या दर्ज है।
– पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के फैसले के बाद भी अवैध धंधा जारी
नर्मदा नदी के संरक्षण और नशामुक्ति को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने नर्मदा के दोनों किनारों पर पांच किलोमीटर के दायरे में शराब दुकानों को बंद करने का निर्णय लिया था। ऐसे में नर्मदा क्षेत्र में यदि अवैध शराब की इतनी बड़ी खेप सामने आती है तो यह केवल पुलिस कार्रवाई का मामला नहीं, बल्कि शराब की आपूर्ति व्यवस्था और निगरानी तंत्र की भी परीक्षा है।
– क्या शराब दुकानों के स्टॉक की जांच हुई?
अब सवाल यह है कि पुलिस और आबकारी विभाग ने आरोपी से पूछताछ के बाद उन संभावित शराब दुकानों की पहचान की या नहीं, जहां से शराब खरीदी गई बताई जा रही है।
– क्या संबंधित दुकानों के स्टॉक रजिस्टर की जांच की गई?
क्या बिक्री का रिकॉर्ड मिलाया गया? क्या सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई? क्या शराब की खरीद-बिक्री से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ हुई? क्या शराब परिवहन में इस्तेमाल वाहन अथवा माध्यम की जानकारी जुटाई गई? यदि इन सवालों की जांच नहीं होती है तो कार्रवाई केवल शराब जब्त करने और एक व्यक्ति की गिरफ्तारी तक सीमित होकर रह जाएगी।
– ठेकेदार की भूमिका भी जांच के दायरे में आए
यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि जब्त शराब किसी अधिकृत शराब दुकान के माध्यम से अवैध रूप से बाहर निकली, स्टॉक में हेरफेर हुआ अथवा शराब की आपूर्ति में संबंधित लाइसेंसी की भूमिका रही, तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच होना जरूरी है। हालांकि किसी ठेकेदार या शराब दुकान को बिना जांच दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, लेकिन यदि शराब का स्रोत लाइसेंसी दुकान तक पहुंचता है तो जांच की जिम्मेदारी वहीं तक जाना भी जरूरी है।
– ‘शराब किसके पास मिली’ से आगे बढ़कर ‘आई कहां से’ की जांच जरूरी
106.740 लीटर शराब की बरामदगी कोई छोटी कार्रवाई नहीं है। यदि आरोपी लंबे समय से शराब की खरीद-बिक्री कर रहा था तो यह भी जांच का विषय है कि उसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई तभी प्रभावी मानी जाएगी जब पुलिस और आबकारी विभाग सिर्फ छोटे विक्रेताओं तक सीमित न रहकर शराब के मूल स्रोत और सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचे। अब निगाह इस बात पर है कि पुलिस और आबकारी विभाग इस मामले में आगे सप्लाई लाइन की जांच करते हैं या नहीं। क्योंकि असली सवाल अभी भी वही है—डिंडौरी में पकड़ी गई इतनी भारी मात्रा में शराब आखिर आई कहां से और किसने पहुंचाई? यदि स्रोत तक जांच पहुंचती है तो यह कार्रवाई अवैध शराब के बड़े नेटवर्क का खुलासा कर सकती है, अन्यथा यह कार्रवाई भी महज जब्ती और गिरफ्तारी तक सीमित होकर रह जाएगी।








