डिंडौरी न्यूज। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जहां शासकीय कार्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज फहराकर देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश दिया जा रहा था, वहीं समनापुर स्थित महिला एवं बाल विकास विभाग के कुछ कर्मचारियों द्वारा बनाया गया एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।
बताया जा रहा है कि 15 अगस्त के अवसर पर विभागीय कार्यालय परिसर में तिरंगा फहराने के बाद विभाग से जुड़े कुछ कर्मचारियों ने एक रील बनाकर अपने निजी फेसबुक अकाउंट पर साझा की। रील में फिल्मी गीत *आज रुसवा तेरी गलियों में मोहब्बत होगी* का इस्तेमाल किया गया है। वीडियो में सात महिला कर्मचारी नजर आ रही हैं और इसके पीछे महिला एवं बाल विकास विभाग समनापुर का शासकीय भवन भी स्पष्ट दिखाई देता है।
– सवाल यह कि क्या सरकारी कार्यालय परिसर में इस तरह की रील उचित है?
मामला सामने आने के बाद लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या शासकीय कार्यालय एवं कार्यालय परिसर को इस प्रकार के निजी सोशल मीडिया वीडियो के लिए इस्तेमाल किया जाना उचित है? भले ही वीडियो कर्मचारियों के निजी सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किया गया हो, लेकिन जब उसमें शासकीय भवन और विभागीय परिसर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा हो, तो इसकी सार्वजनिक मर्यादा और विभाग की छवि को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
– भवन बदहाल, परिसर में सफाई का भी सवाल
वीडियो का दूसरा पहलू भी लोगों का ध्यान खींच रहा है। रील के पीछे दिखाई दे रहे महिला एवं बाल विकास विभाग के भवन की हालत देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि लंबे समय से भवन की रंगाई-पुताई और रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया है। परिसर में भी अपेक्षित साफ-सफाई नजर नहीं आती।
लोगों का कहना है कि यदि इसी शासकीय भवन और परिसर को स्वच्छता, श्रमदान, पौधारोपण, रंगाई-पुताई या किसी जनहितकारी गतिविधि के वीडियो के माध्यम से दिखाया जाता, तो इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाता।
– पर्यवेक्षकों पर बड़ी जिम्मेदारी
वीडियो में दिखाई देने वाली जया मिश्रा, स्वप्निल पुरी, अरुणा मेश्राम, बसंती धुर्वे और सरिता इनवाती ओर एक अन्य के पर्यवेक्षक पद पर होने की जानकारी सामने आई है। वहीं अंजली वारया ब्लॉक कोऑर्डिनेटर के रूप में कार्यरत बताई जा रही हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग के मैदानी अमले की जिम्मेदारी काफी महत्वपूर्ण है। पर्यवेक्षकों को शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करना, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को उनके दायित्वों के प्रति जागरूक करना तथा विभागीय योजनाओं की निगरानी करना होती है। वहीं गर्भवती एवं धात्री महिलाओं, छोटे बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, भोजन तथा प्रारंभिक शिक्षा जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियों पर भी विभाग की निगरानी रहती है।
– रील नहीं, जिम्मेदारी का संदेश चाहिए
लोगों का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर अपनी व्यक्तिगत गतिविधियां साझा करने से पहले यह भी ध्यान रखना चाहिए कि उनकी पोस्ट से संबंधित विभाग की सार्वजनिक छवि पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। खासकर जब वीडियो शासकीय कार्यालय परिसर में बनाया गया हो।
स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर यदि यही कर्मचारी स्वच्छ कार्यालय–स्वस्थ समाज, आंगनबाड़ी केंद्रों की स्वच्छता, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, कुपोषण मुक्त बचपन या हर बच्चे तक पोषण जैसे संदेश देते हुए वीडियो बनाते, तो वह न केवल विभाग की गरिमा के अनुरूप होता बल्कि आम लोगों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए भी प्रेरणादायी संदेश बन सकता था।
अब सवाल यह है कि क्या विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस वीडियो को संज्ञान में लेकर यह स्पष्ट करेंगे कि शासकीय कार्यालय परिसर में इस प्रकार की सोशल मीडिया रील बनाना विभागीय दृष्टि से उचित है या नहीं? साथ ही, क्या बदहाल भवन और परिसर की साफ-सफाई एवं रखरखाव पर भी जिम्मेदार अधिकारी ध्यान देंगे?











