डिंडौरी। जनजातीय अंचलों में तेजी से फैल रही अनुवांशिक बीमारी सिकल सेल एनीमिया के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय डिंडौरी में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्रणाम नर्मदा युवा संघ एवं जन स्वास्थ्य सहयोग, गनियारी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया, जिसमें विद्यार्थियों को बीमारी के कारण, लक्षण, बचाव और प्रबंधन के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि सिकल सेल एनीमिया एक अनुवांशिक (जेनेटिक) बीमारी है, जो माता-पिता से बच्चों में स्थानांतरित होती है। इस बीमारी में लाल रक्त कोशिकाओं (रेड ब्लड सेल्स) का सामान्य गोल आकार बदलकर हंसिया (सिकल) जैसा हो जाता है, जिससे शरीर में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन का संचार प्रभावित होता है और कई स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
कार्यक्रम में बताया गया कि समाज में इस बीमारी को लेकर अनेक भ्रांतियां और अंधविश्वास प्रचलित हैं, जिन्हें वैज्ञानिक जानकारी और जागरूकता के माध्यम से दूर करना आवश्यक है। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को सिकल सेल एनीमिया के विभिन्न प्रकार, इसके लक्षण, संभावित जटिलताओं तथा जेनेटिक काउंसलिंग की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। साथ ही ‘सिकल कुंडली’ की अवधारणा समझाते हुए बताया गया कि विवाह से पूर्व सिकल जांच और सिकल कुंडली का मिलान इस बीमारी की अगली पीढ़ी में संभावना को काफी हद तक कम कर सकता है।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि गर्भावस्था के दौरान समय पर जांच कर इस बीमारी की पहचान संभव है, जिससे उचित चिकित्सकीय परामर्श के माध्यम से बेहतर निर्णय लिए जा सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिकल सेल एनीमिया जन्म से लेकर जीवनभर रहने वाली बीमारी है। वर्तमान में इसका पूर्ण इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन नियमित दवाइयों, संतुलित दिनचर्या, पर्याप्त पानी पीने, संक्रमण से बचाव और समय-समय पर चिकित्सकीय परामर्श के माध्यम से रोगी सामान्य जीवन जी सकता है।
कार्यक्रम में डॉ. विकास चंदेल ने सिकल सेल एनीमिया के वैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। वहीं जन स्वास्थ्य सहयोग की परामर्शदाता रेनू साहू, नयनवती मरावी, ओमप्रकाश बैगा एवं ईश्वर मोहले ने विद्यार्थियों के प्रश्नों के उत्तर देते हुए बीमारी की रोकथाम और प्रबंधन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
विद्यालय की प्रभारी प्राचार्य श्रीमती उपासना चौबे ने कार्यक्रम को विद्यार्थियों और समाज के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि ऐसी जागरूकता गतिविधियां भविष्य में सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर अनुवांशिक बीमारी की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की वरिष्ठ शिक्षिका ललिता डेनियल सहित विद्यालय परिवार के सदस्य एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।












