– ‘काम सचिव स्तर का, लेकिन मानदेय चतुर्थ श्रेणी से भी कम’—ग्राम रोजगार सहायक संगठनों में असंतोष व्याप्त
भोपाल। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद द्वारा 13 जुलाई 2026 को जारी आदेश के तहत परिषद के विभिन्न संविदा पदों के कर्मचारियों के मासिक पारिश्रमिक में 4.46 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। यह वृद्धि 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी तथा एरियर का भुगतान भी किया जाएगा।
हालांकि इस आदेश में ग्राम रोजगार सहायकों (GRS) का नाम शामिल नहीं होने से प्रदेशभर के रोजगार सहायक संगठनों में नाराजगी और असंतोष व्याप्त है। उनका कहना है कि मनरेगा की जमीनी स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी ग्राम रोजगार सहायकों पर होती है, लेकिन जब मानदेय बढ़ाने की बात आती है तो उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जाता है।


रोजगार सहायकों का कहना है कि उनसे शासन द्वारा प्रमुख सचिव स्तर के निर्देशों का पालन कराया जाता है और योजनाओं के क्रियान्वयन की पूरी जिम्मेदारी सौंपी जाती है, लेकिन आर्थिक लाभ देने के समय उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है। उनका सवाल है कि यदि ग्राम रोजगार सहायक मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद के कर्मचारी नहीं हैं, तो सरकार स्पष्ट करे कि वे आखिर किस विभाग के कर्मचारी हैं।
संगठनों का आरोप है कि कई संवर्गों का पारिश्रमिक लगातार बढ़ाया जा रहा है, जबकि ग्राम रोजगार सहायकों का मानदेय वर्षों से उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं बढ़ाया गया। उनका कहना है कि वर्तमान में उनका मानदेय कई अन्य श्रेणियों के कर्मचारियों से भी कम है, जबकि कार्यभार सबसे अधिक है। रोजगार सहायक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि ग्राम रोजगार सहायकों को भी परिषद के अन्य कर्मचारियों की तरह पारिश्रमिक वृद्धि का लाभ दिया जाए तथा उनकी सेवा और वेतन संबंधी स्थिति को स्पष्ट किया जाए। चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।







