– भागदौड़ भरी जिंदगी में ‘अल्पविराम’ जरूरी: कार्यशाला में आत्मचिंतन, तनाव प्रबंधन और सकारात्मक जीवन का मिला संदेश
डिंडौरी न्यूज। जनजातीय कार्य विभाग, जिला डिंडौरी द्वारा राज्य आनंद संस्थान के मार्गदर्शन में शनिवार को “अल्पविराम” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य छात्रावास अधीक्षकों में आत्मचिंतन, मानसिक संतुलन, सकारात्मक सोच और आनंदम जीवन शैली के प्रति जागरूकता विकसित करना था। कार्यक्रम में जिले के 145 छात्रावास अधीक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर आत्मविकास एवं मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण प्राप्त किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शहपुरा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने कहा कि जीवन की निरंतर भागदौड़ में प्रत्येक व्यक्ति को समय-समय पर स्वयं के लिए ‘अल्पविराम’ लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि “अपने मन की अंतरात्मा की शक्ति को पहचानना ही वास्तविक अल्पविराम है।” आत्ममंथन और सकारात्मक चिंतन से व्यक्ति न केवल बेहतर निर्णय लेने में सक्षम होता है, बल्कि जीवन में संतुलन और आनंद का अनुभव भी करता है।
कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया, संयुक्त कलेक्टर सुश्री भारती मेरावी, राज्य आनंद संस्थान के प्रदेश कार्यक्रम समन्वयक आकाश दुबे, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य राजेन्द्र जाटव तथा जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती अंजू जितेन्द्र ब्यौहार सहित अनेक अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण सत्र में कटनी से आए मास्टर ट्रेनर अनिल कांबले, डीपीएल श्रीमती मनीषा कांबले एवं मास्टर ट्रेनर श्रीमती मंजूषा शर्मा ने सहभागियों को संवाद, समूह गतिविधियों और अभ्यासों के माध्यम से आत्मबोध, तनाव प्रबंधन, भावनात्मक संतुलन, सकारात्मक जीवन दृष्टि तथा आनंदम के मूल सिद्धांतों से परिचित कराया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को दैनिक जीवन में मानसिक शांति बनाए रखने, कार्य के दबाव को संतुलित करने तथा व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के व्यावहारिक उपाय भी बताए गए।
कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से न केवल उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों के साथ संवेदनशील, सकारात्मक और प्रेरणादायक वातावरण तैयार करने में भी मदद मिलेगी। अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि “अल्पविराम” जैसी पहल से जनजातीय छात्रावासों में कार्यरत अधीक्षक मानसिक रूप से अधिक सशक्त होकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।









