होम राज्य मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़़ क्राइम न्यूज इंटरनेशनल न्यूज कोर्ट न्यूज राजनीति संसदीय संपादकीय अर्थ जगत हेल्थ शिक्षा खेल विज्ञान

संकट में गरीब, फाइलों में राहत: दो वर्षों से लंबित पड़े संबल योजना के 136 अनुग्रह सहायता प्रकरण

akvlive.in

Published

– प्रभारी मुख्यकार्यपालन प्रमोद कुमार ओझा की लापरवाही उजागर, शहपुरा जनपद सीईओ की रिपोर्ट से हुआ खुलासा

डिंडौरी न्यूज। प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल 2.0) योजना सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए लगातार अभियान चला रही है। विशेष रूप से आदिवासी बहुल और पिछड़े जिलों में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया जा रहा है। इसके बावजूद डिंडौरी जिले के शहपुरा जनपद पंचायत से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जनपद पंचायत शहपुरा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा 9 जुलाई 2026 को कलेक्टर को भेजे गए प्रतिवेदन के अनुसार, डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (डीएससी) नहीं लगने के कारण मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल 2.0) योजना के 136 अनुग्रह सहायता प्रकरण पिछले लगभग दो वर्षों से संबल पोर्टल पर लंबित पड़े हैं। इसका सीधा असर उन गरीब एवं श्रमिक परिवारों पर पड़ा है, जिन्हें संकट की घड़ी में शासन से आर्थिक सहायता मिलनी थी।

प्रतिवेदन के अनुसार, लंबित प्रकरणों में 71 आवेदन 180 दिन से अधिक पुराने हैं, जबकि 35 आवेदन श्रम शाखा को प्रेषित किए जा चुके हैं।

 समय-सीमा के भीतर प्राप्त आवेदनों सहित कुल 136 प्रकरण अभी भी लंबित हैं।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि तत्कालीन प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रमोद कुमार ओझा द्वारा इन प्रकरणों का समय पर निराकरण नहीं किए जाने के कारण यह स्थिति बनी। वर्तमान मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि पदभार संभालने के बाद 48 लंबित प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है, जबकि शेष मामलों में कार्रवाई जारी है।

संबल 2.0 योजना असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए संचालित एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजना है। इस योजना के तहत सामान्य अथवा दुर्घटनाजन्य मृत्यु की स्थिति में पात्र परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। ऐसे में दो वर्षों तक प्रकरण लंबित रहने से अनेक जरूरतमंद परिवार समय पर सहायता से वंचित रहे।

यह मामला केवल तकनीकी समस्या का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का भी है। जब सरकार योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है और हितग्राहियों तक लाभ पहुंचाने का दावा कर रही है, तब अधिकारियों की लापरवाही के कारण यदि गरीब परिवारों को वर्षों तक सहायता नहीं मिलती, तो योजनाओं की प्रभावशीलता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..

संबंधित ख़बरें