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100 सीटर छात्रावास पर कैंची : आदिवासी अंचल कमको मोहनिया में 50 सीटों की स्वीकृति से बढ़ा असंतोष

akvlive.in

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– कमको मोहनिया के सरपंच ने कलेक्टर व जनजातीय कार्य विभाग को भेजा पत्र, कहा- 12 गांवों की 150 से अधिक बालिकाओं के भविष्य से जुड़ा है मामला

डिंडौरी। जिले के अंतिम छोर पर बसे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र कमको मोहनिया में जनजातीय कार्य विभाग द्वारा पूर्व में स्वीकृत 100 सीटर बालिका छात्रावास को घटाकर 50 सीटर किए जाने के निर्णय का विरोध शुरू हो गया है। इस फैसले से क्षेत्र के ग्रामीणों, पालकों और छात्राओं में गहरा असंतोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे दूरस्थ वनांचल की दर्जनों बालिकाएं आवासीय सुविधा और बेहतर शिक्षा से वंचित हो जाएंगी।

ग्राम पंचायत कमको मोहनिया के सरपंच फूल सिंह मरकाम ने इस संबंध में कलेक्टर डिंडौरी को पत्र भेजकर पूर्व की भांति 100 सीटर बालिका छात्रावास की स्वीकृति बहाल करने की मांग की है। पत्र की प्रतिलिपि जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त एवं सहायक आयुक्त को भी भेजी गई है।

सरपंच फूलसिंह मरकाम द्वारा 29 जून 2026 को भेजे गए पत्र के अनुसार जनजातीय कार्य विभाग ने पूर्व में कक्षा 9वीं से 12वीं तक की छात्राओं के लिए 100 सीटर कन्या छात्रावास की स्वीकृति प्रदान की थी। इससे क्षेत्र के लोगों में खुशी थी और उन्हें उम्मीद थी कि पिछड़े एवं आदिवासी परिवारों की बेटियों को सुरक्षित आवासीय सुविधा के साथ उच्च शिक्षा का अवसर मिलेगा। लेकिन बाद में संशोधित आदेश जारी कर छात्रावास की क्षमता घटाकर 50 सीट कर दी गई, जिससे लोगों की उम्मीदों को झटका लगा है।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि ग्राम पंचायत कमको मोहनिया के आसपास लगभग 15 किलोमीटर के दायरे में 12 गांव स्थित हैं, जहां कक्षा 9वीं से 12वीं तक अध्ययनरत लगभग 150 आदिवासी बालिकाएं हैं। निकटतम कन्या छात्रावास करीब 20 किलोमीटर दूर होने के कारण छात्राओं को रोजाना जंगल और नालों से होकर विद्यालय आना-जाना पड़ता है। इस दौरान जंगली जानवरों और असामाजिक तत्वों का खतरा बना रहता है। यही कारण है कि कई अभिभावक बेटियों को आठवीं कक्षा के बाद आगे पढ़ाने से भी हिचकते हैं।

सरपंच फूल सिंह मरकाम ने कहा कि 100 सीटों के स्थान पर केवल 50 सीटों की स्वीकृति मिलने से मात्र 50 छात्राओं को ही लाभ मिल पाएगा, जबकि करीब 100 बालिकाएं आवासीय सुविधा से वंचित रह जाएंगी। उन्होंने शासन से ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ की भावना को ध्यान में रखते हुए पूर्व स्वीकृत 100 सीटर बालिका छात्रावास को पुनः बहाल करने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि शासन ने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया तो दूरस्थ आदिवासी क्षेत्र की बेटियों की शिक्षा गंभीर रूप से प्रभावित होगी। उन्होंने प्रशासन और जनजातीय कार्य विभाग से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर क्षेत्र की छात्राओं के भविष्य को सुरक्षित करने की मांग की है।

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..

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