– अन्य व्यय और पंचायत कर्मचारियों को लाखों का भुगतान, विकास कार्य ठप
डिंडौरी जिले की जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत कसईसोडा में 15वें वित्त आयोग की राशि में बड़े पैमाने पर अनियमितता और बंदरबाट का मामला सामने आया है। विकास कार्यों के लिए आवंटित राशि को पंचायत के करिंदों द्वारा “अन्य व्यय” और पंचायत कर्मचारियों के नाम पर आहरित कर खर्च किए जाने के आरोप लगे हैं। इस पूरे मामले ने पंचायत स्तर पर निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पंचायत राज मंत्रालय द्वारा 15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। मंत्रालय ने टाइड एवं अनटाइड फंड के अंतर्गत निर्धारित कार्यों पर ही राशि खर्च करने के आदेश दिए हैं। साथ ही गैर अनुमत्य और फिजूल खर्चों पर प्रतिबंध लगाते हुए भुगतान नहीं करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके बावजूद ग्राम पंचायत कसईसोडा में नियमों को दरकिनार कर राशि खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है।

आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत द्वारा जीपीडीपी (ग्राम पंचायत विकास योजना) में हर वर्ष बड़ी संख्या में विकास कार्य प्रस्तावित किए गए, लेकिन धरातल पर कार्य नगण्य रहे। वर्ष 2020 में 18 कार्य प्रस्तावित किए गए, जिनमें केवल 4 कार्य प्रारंभ हुए। वर्ष 2021 में प्रस्तावित 11 कार्यों में सिर्फ 2 कार्य शुरू किए गए। वर्ष 2022 में प्रस्तावित 18 कार्यों में एक भी कार्य प्रारंभ नहीं हुआ। वर्ष 2023 में प्रस्तावित 51 कार्यों में केवल 2 कार्य शुरू हुए, जबकि वर्ष 2024 में प्रस्तावित 41 कार्यों में मात्र 4 कार्य और वर्ष 2025 में प्रस्तावित 42 कार्यों में केवल 1 कार्य प्रारंभ किया गया।
वहीं दूसरी ओर पंचायत में “ऑफिस व्यय” और “अन्य व्यय” के नाम पर लाखों रुपए के भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव द्वारा शासन के दिशा-निर्देशों को नजरअंदाज करते हुए पंचायत कर्मचारी लखन सिंह और अनूप सिंह के खातों में 5वें वित्त एवं 15वें वित्त मद से लाखों रुपए की राशि आहरित कर भुगतान किया गया है। इसे लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
मामले का एक और गंभीर पक्ष विकास कार्यों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग को लेकर सामने आया है। शासन की मंशा है कि 15वें वित्त से स्वीकृत कार्यों में पारदर्शिता बनी रहे और जनता के साथ वरिष्ठ अधिकारी भी ऑनलाइन समीक्षा कर सकें। इसके लिए कार्य प्रारंभ, मध्य स्तर और पूर्णता के दौरान तीन चरणों में स्पष्ट फोटो अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन आरोप है कि ग्राम पंचायत द्वारा पोर्टल पर धुंधले और अंधेरे फोटो अपलोड कर वास्तविक स्थिति छिपाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे शासन की पारदर्शिता व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही 15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग और पंचायत स्तर पर हुए भुगतानों की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग भी तेज हो गई है।
इस संबंध में अधिकारिक जानकारी हेतु सचिव से संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया।












