भोपाल/डिंडौरी। मध्यप्रदेश में आदिवासी स्वशासन और ग्राम सभाओं को अधिकार संपन्न बनाने के उद्देश्य से लागू किए गए पेसा (PESA) अधिनियम के जमीनी क्रियान्वयन को बड़ा झटका लगा है। प्रदेश सरकार और पंचायत राज संचालनालय द्वारा आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को मजबूत करने के लिए नियुक्त किए गए हजारों ग्राम सभा मोबिलाइजरों की सेवाएं समाप्त करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
पंचायत राज संचालनालय, भोपाल द्वारा जारी पत्र क्रमांक RGSA-83/2026 में स्पष्ट कहा गया है कि भारत सरकार की संशोधित आरजीएसए योजना की अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है। इसी योजना के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यरत पेशा मोबिलाइजरों को मानदेय दिया जाता था। योजना समाप्त होने और नई नीति पर निर्णय लंबित होने के कारण अब इन सेवाओं को जारी रखना संभव नहीं बताया गया है।

चुनाव से पहले “आदिवासियों का अधिकार” बताया गया था PESA
विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पेसा एक्ट को आदिवासियों को उनका “बुनियादी हक” दिलाने वाला ऐतिहासिक कानून बताया था। सरकार ने बड़े स्तर पर प्रचार करते हुए दावा किया था कि PESA कानून से ग्राम सभाओं को मजबूत किया जाएगा और आदिवासी समाज को जल, जंगल और जमीन पर अधिकार मिलेगा।
प्रदेश में 11,596 ग्रामों में PESA अधिनियम लागू किए जाने का दावा किया गया था, जिसके लिए करीब 4,850 ग्राम सभा मोबिलाइजर नियुक्त किए गए थे। इन मोबिलाइजरों की जिम्मेदारी गांव-गांव जाकर ग्राम सभाओं को जागरूक करना, कानून की जानकारी देना, ग्राम स्तरीय बैठकों का संचालन कराना और स्थानीय स्वशासन को सक्रिय करना था।
– आदिवासी बाहुल्य इन जिलों में लागू होगा आदेश
पंचायत राज संचालनालय द्वारा यह आदेश प्रदेश के अनुसूचित एवं आदिवासी बहुल जिलों —
झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, धार, खरगोन, रतलाम, खंडवा, बुरहानपुर, नर्मदापुरम, बैतूल, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, सीधी, शहडोल, उमरिया और छतरपुर — के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को भेजा गया है।
पत्र में संबंधित जिला पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि ग्राम पंचायतों को तत्काल सूचना देकर पेशा मोबिलाइजरों को सेवामुक्त किया जाए तथा कार्रवाई की जानकारी संचालनालय को भेजी जाए।
– गांव-गांव पहुंचाई थी PESA की जानकारी

ग्राम सभा मोबिलाइजर पिछले कई वर्षों से आदिवासी क्षेत्रों में सरकार और ग्राम सभाओं के बीच सेतु की भूमिका निभा रहे थे। उन्होंने ग्रामीणों को ग्राम सभा के अधिकार, वनाधिकार कानून, खनिज संसाधनों पर स्थानीय भागीदारी, सामाजिक योजनाओं की निगरानी और पंचायत व्यवस्था की जानकारी देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कई क्षेत्रों में मोबिलाइजरों के माध्यम से पहली बार ग्राम सभाएं नियमित रूप से आयोजित होने लगी थीं। ऐसे में उनकी सेवाएं समाप्त होने से PESA कानून के वास्तविक क्रियान्वयन पर भी सवाल उठने लगे हैं।
– हजारों युवाओं के सामने रोजगार संकट
प्रदेशभर में कार्यरत लगभग 4,850 मोबिलाइजरों के सामने अब रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। अधिकांश मोबिलाइजर आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं, जिन्होंने कम मानदेय में वर्षों तक गांवों में काम किया। अचानक सेवाएं समाप्त किए जाने से इन युवाओं में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।

हालांकि संचालनालय ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि भारत सरकार से आगे कोई नया निर्देश प्राप्त होने पर पृथक से सूचना जारी की जाएगी, लेकिन फिलहाल मोबिलाइजरों की सेवाएं समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।










