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Dindori News : आयुष्मान कार्ड जुटाकर ग्रामीणों को ले जाते थे जबलपुर, फर्जी उपचार के जरिए सरकारी खजाने को चपत लगाने का आरोप

एडीटर: Chetram Rajpoot November 1, 2026

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 – 4-5 साल से ग्रामीणों के आयुष्मान कार्ड जुटाकर जबलपुर ले जाने का आरोप, बिना गंभीर बीमारी के मरीजों को अस्पताल में भर्ती दर्शाकर शासन से राशि लेने की आशंका

– शहपुरा पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त कार्रवाई में दो वाहन जब्त

डिंडौरी न्यूज ।आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के नाम पर कथित फर्जीवाड़े और शासन को करोड़ों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाने के मामले का डिंडौरी जिले में खुलासा हुआ है। शहपुरा पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त कार्रवाई में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि जबलपुर स्थित सुखसागर मेडिकल कॉलेज अस्पताल से जुड़े कुछ लोग पिछले चार-पांच वर्षों से एजेंटों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष्मान कार्ड एकत्रित कर रहे थे। ग्रामीणों को बेहतर और निःशुल्क उपचार का प्रलोभन देकर जबलपुर ले जाया जाता था और वास्तविक चिकित्सकीय आवश्यकता के बिना अस्पताल में भर्ती दर्शाकर आयुष्मान योजना के तहत शासन से उपचार की राशि प्राप्त करने का कथित षड्यंत्र किया जा रहा था।

पुलिस के अनुसार, इस गतिविधि के संबंध में लगातार शिकायतें और सूचनाएं मिल रही थीं। इसी आधार पर 31 अक्टूबर 2026 को सुबह करीब 7 बजे शहपुरा एसडीएम और तहसीलदार के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम ने थाना शहपुरा क्षेत्र के ग्राम पिपरिया माल और कौआझिर में कार्रवाई की। इस दौरान कुछ व्यक्ति स्वयं को जबलपुर के सुखसागर मेडिकल कॉलेज से संबद्ध बताकर ग्रामीणों को निःशुल्क उपचार और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा देते हुए दो वाहनों से जबलपुर ले जा रहे थे।

– 19 ग्रामीणों का कराया गया स्वास्थ्य परीक्षण

कार्रवाई के दौरान वाहन क्रमांक MP20PA1209 और MP20XE2539 में कुल 19 ग्रामीण मरीज सवार मिले। प्रशासनिक टीम ने तत्काल खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) शहपुरा से सभी का स्वास्थ्य परीक्षण एवं निरीक्षण कराया। पुलिस के मुताबिक, परीक्षण के दौरान किसी भी मरीज में गंभीर बीमारी के लक्षण नहीं पाए गए। प्रारंभिक जांच में यह आशंका सामने आई कि ग्रामीणों को बिना वास्तविक चिकित्सकीय आवश्यकता के आयुष्मान कार्ड के माध्यम से योजना की राशि प्राप्त करने के उद्देश्य से जबलपुर ले जाया जा रहा था।

जांच के दौरान ग्रामीणों के कथनों से यह बात भी सामने आई कि जिन लोगों के पास आयुष्मान कार्ड नहीं था, उनके उपचार नहीं किए जाने की बात संबंधित व्यक्तियों द्वारा कही गई थी। इस घटनाक्रम ने ग्रामीणों को योजना के नाम पर अस्पताल ले जाने की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

– छह आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज, सभी गिरफ्तार

पुलिस ने ग्रामीणों को प्रलोभन देकर आयुष्मान कार्ड एकत्रित करने, योजना का कथित दुरुपयोग कर बेईमानीपूर्वक शासकीय राशि प्राप्त करने तथा शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाने के आरोप में थाना शहपुरा में अपराध क्रमांक 624/2026 दर्ज किया है। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 61(2) एवं 3(5) के तहत मामला पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू की गई है।

पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में उमेश मिश्रा, अवधेश दुबे, विमल राय, संतोष कुमार पटेल (प्रचारक), संजय दुबे और राजा खरे (वाहन चालक) शामिल हैं।

– अस्पताल मैनेजर के कहने पर काम करने का पूछताछ में खुलासा

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में जबलपुर स्थित सुखसागर मेडिकल कॉलेज के मैनेजर संजय शर्मा के कहने पर पिछले चार-पांच वर्षों से इस तरह का काम किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इस पूरे कथित नेटवर्क में अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। विवेचना के दौरान योजना के तहत किए गए उपचार संबंधी दावों और शासन से प्राप्त राशि के संबंध में भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना है।

– दो वाहन जब्त, पुलिस की ग्रामीणों से अपील

पुलिस ने इस प्रकरण में इस्तेमाल किए गए दोनों वाहनों MP20PA1209 और MP20XE2539 को जब्त कर लिया है। संयुक्त कार्रवाई पुलिस अधीक्षक डिंडौरी, एसडीओपी शहपुरा, एसडीएम शहपुरा एवं तहसीलदार शहपुरा के मार्गदर्शन में की गई।

कार्रवाई में थाना प्रभारी शहपुरा ताकेश्वरी मरकाम, उप निरीक्षक मनीराम मरावी, सहायक उप निरीक्षक घसीटा लाल रजक, प्रधान आरक्षक कमलेश मरावी सहित अन्य पुलिसकर्मियों और राजस्व विभाग की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

डिंडौरी पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि शासकीय स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना आयुष्मान कार्ड, आधार कार्ड अथवा अन्य व्यक्तिगत दस्तावेज न सौंपें। निःशुल्क उपचार या अन्य सुविधाओं का प्रलोभन देकर दस्तावेज एकत्रित करने वाले संदिग्ध व्यक्तियों की जानकारी तत्काल पुलिस अथवा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को दें।

 

एडीटर

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत ‘मध्यभूमि के बोल’ के संपादक हैं और दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के खुलासे और जमीनी खोजी पत्रकारिता के लिए उनकी पहचान है।...

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