—Advertisement—

मेहंदवानी वन परिक्षेत्र में हाथी के हमले से बुजुर्ग की मौत, दो दिन से लापता था 65 वर्षीय लालू सिंह

एडीटर: Chetram Rajpoot October 30, 2026

—Advertisement—

Contact on WhatsApp

–  डोभी गांव के पास हाथी की मौजूदगी वाले क्षेत्र में मिला शव, बुधवार को इसी इलाके में हाथी के हमले में एक अन्य ग्रामीण हुआ था गंभीर घायल; क्षेत्र में दहशत का माहौल

डिंडौरी न्यूज । जिले के मेहंदवानी वन परिक्षेत्र में जंगली हाथी की मौजूदगी के बीच एक बुजुर्ग की मौत का मामला सामने आया है। डोभी गांव के पास हाथी की मूवमेंट वाले क्षेत्र में शुक्रवार को 65 वर्षीय बुजुर्ग का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान लालू सिंह पिता गोरेलाल, उम्र 65 वर्ष, निवासी मटियारी के मोहल्ला करिया ददरा के रूप में हुई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बुजुर्ग की मौत हाथी के हमले से होने की आशंका जताई जा रही है।

जानकारी के मुताबिक लालू सिंह मवेशी चराने के लिए घर से निकले थे, लेकिन इसके बाद वापस नहीं लौटे। बुधवार से उनके लापता होने की बात सामने आई थी। परिजन और ग्रामीण उनकी तलाश कर रहे थे। इसी बीच शुक्रवार को डोभी गांव के समीप उस क्षेत्र में उनका शव मिला, जहां जंगली हाथी की आवाजाही बनी हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

– एक ही क्षेत्र में दूसरी गंभीर घटना

उल्लेखनीय है कि बुधवार को भी इसी क्षेत्र में हाथी के हमले की घटना सामने आई थी। इस दौरान मंगल सिंह परस्ते हाथी के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनका उपचार जारी है। अब इसी इलाके में बुजुर्ग का शव मिलने से वन क्षेत्र से लगे गांवों में भय और चिंता का माहौल है।

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। मवेशी चराने और जंगल से लगे क्षेत्रों में रोजमर्रा के कामों के लिए जाने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। हाथी की लगातार मौजूदगी वाले क्षेत्र में एक व्यक्ति के गंभीर घायल होने और दूसरे बुजुर्ग की मौत की घटना ने खतरे की गंभीरता को सामने ला दिया है।

ग्रामीणों के बीच अब जंगली हाथी की गतिविधियों और संभावित खतरे को लेकर चिंता बनी हुई है। ऐसे में वन क्षेत्र से लगे गांवों में हाथी की मूवमेंट पर सतत निगरानी और ग्रामीणों को समय रहते सतर्क करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

 

एडीटर

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत ‘मध्यभूमि के बोल’ के संपादक हैं और दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के खुलासे और जमीनी खोजी पत्रकारिता के लिए उनकी पहचान है।...

Leave a Comment