डिंडौरी। मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल डिंडौरी जिले में शिक्षकों के बाद अब कृषि विभाग के मैदानी अमले ने भी ई-एचआरएमएस प्रणाली के जरिए मोबाइल ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जिले के सातों विकासखंडों के कृषि विस्तार अधिकारी मंगलवार को उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में एकत्र हुए और कलमबंद हड़ताल कर शासन की व्यवस्था के खिलाफ नारेबाजी की। कृषि विस्तार अधिकारी संघ ने विभागीय अधिकारियों को पत्र भेजकर अपनी मांगों के समर्थन में चरणबद्ध आंदोलन की सूचना भी दी है।
– मैदानी कार्य में ई-अटेंडेंस को बताया अव्यावहारिक
कृषि विस्तार अधिकारियों का कहना है कि उनकी अधिकांश ड्यूटी कार्यालय में नहीं, बल्कि किसानों के खेतों, गांवों और ग्रामीण क्षेत्रों में होती है। किसानों को कृषि संबंधी तकनीकी जानकारी देने, फसलों का निरीक्षण करने, योजनाओं के क्रियान्वयन, विभागीय गतिविधियों और अन्य शासकीय कार्यों के लिए अधिकारियों को लगातार मैदानी क्षेत्र में रहना पड़ता है। ऐसे में मोबाइल के माध्यम से ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता उनके नियमित मैदानी कार्य में व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा कर रही है।
संघ ने मांग की है कि कृषि विस्तार अधिकारियों को मोबाइल ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए और उनके मैदानी कार्य की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए उपस्थिति दर्ज करने की वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाए।
– पदों की संख्या बढ़ाने और मानदेय में वृद्धि की मांग
ई-अटेंडेंस के अलावा कृषि विस्तार अधिकारी संघ ने वर्षों से लंबित अन्य मांगों को भी आंदोलन में शामिल किया है। संघ का कहना है कि विभाग में कृषि विस्तार अधिकारियों के पदों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि मैदानी स्तर पर अधिकारियों पर बढ़ते कार्यभार को कम किया जा सके।
इसके साथ ही अतिरिक्त कार्य के एवज में मिलने वाले मानदेय में वृद्धि की मांग भी संघ ने प्रमुखता से उठाई है। संघ का तर्क है कि सीमित मानव संसाधन के बीच अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां निभानी पड़ रही हैं, लेकिन उसके अनुरूप सुविधाएं और मानदेय नहीं मिल रहा है।
– 21 अगस्त को प्रदेश स्तर पर प्रदर्शन
कृषि विस्तार अधिकारी संघ ने अपनी मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। संघ के मुताबिक पहले विकासखंड स्तर पर कार्य बहिष्कार किया गया, जिसके बाद 17 से 20 अगस्त तक जिला स्तर पर कार्य बहिष्कार किया जाएगा। इसके बाद 21 अगस्त को प्रदेश स्तर पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन प्रस्तावित है। संघ ने शासन और प्रशासन से मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए जल्द निर्णय लेने और आवश्यक आदेश जारी करने की मांग की है।
– किसानों से जुड़ी सेवाओं पर पड़ सकता है असर
डिंडौरी जिला कृषि गतिविधियों के लिहाज से बड़े ग्रामीण क्षेत्र में फैला हुआ है और कृषि विस्तार अधिकारियों की भूमिका किसानों तक शासन की योजनाओं, तकनीकी सलाह और विभागीय सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में यदि आंदोलन लंबा खिंचता है तो कृषि विभाग की मैदानी गतिविधियों के साथ-साथ किसानों से जुड़ी सेवाओं पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है।
अब देखना होगा कि कृषि विस्तार अधिकारियों की मांगों और ई-अटेंडेंस को लेकर शासन एवं विभागीय स्तर पर क्या निर्णय लिया जाता है और क्या आंदोलन समाप्त कराने के लिए कोई ठोस पहल होती है।












