डिंडौरी न्यूज । सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध नहीं कराना तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी एवं तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जगन्नाथ मरकाम को भारी पड़ गया। मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग ने मामले की सुनवाई के बाद उन्हें 10 हजार रुपये की शास्ति से दंडित किया है। आयोग ने माना कि आवेदक द्वारा मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराए जाने से सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 7 का उल्लंघन हुआ।
राज्य सूचना आयोग के आयुक्त ओंकार नाथ द्वारा 22 जुलाई 2026 को जारी आदेश में शास्ति राशि एक माह के भीतर आयोग कार्यालय में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही शास्ति राशि जमा किए जाने का पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए 21 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजे अगली सुनवाई निर्धारित की गई है।
– 2023 में मांगी गई थी जानकारी
आयोग के समक्ष प्रस्तुत प्रकरण के अनुसार अपीलार्थी दीपक ठाकुर ने 12 अप्रैल 2023 को सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(1) के तहत आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन में तत्कालीन अमरपुर चौकी में पदस्थ सब इंस्पेक्टर मनोज त्रिपाठी से संबंधित विभिन्न जानकारियां मांगी गई थीं।
आवेदन में उनकी वर्ष 2022 में अमरपुर चौकी में पदस्थापना, नियुक्ति/पदस्थापना से संबंधित दस्तावेज तथा उनके विरुद्ध की गई शिकायतों, शिकायतों पर हुई कार्रवाई और विभागीय जांच से संबंधित प्रमाणित प्रतियां मांगी गई थीं।
आवेदक का कहना था कि मांगी गई जानकारी उसके लिए महत्वपूर्ण थी और संबंधित दस्तावेज उसे अपने पक्ष एवं प्रतिरक्षा के लिए आवश्यक थे।
– समय पर सूचना नहीं मिलने पर पहुंचा आयोग
आवेदक को निर्धारित समय में पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं होने के बाद मामला मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग के समक्ष पहुंचा। आयोग ने सुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारियों से जवाब और अभिलेख तलब किए।
29 अप्रैल 2026 की सुनवाई में आयोग ने आवेदन के बिंदु क्रमांक-3 से संबंधित शिकायतों और विभागीय जांच से जुड़े दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने के संबंध में निर्देश दिए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दस्तावेजों में किसी तृतीय पक्ष की व्यक्तिगत या गोपनीय जानकारी शामिल हो तो सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 10 के तहत संबंधित हिस्से को पृथक कर शेष जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है।
– आयोग ने जारी किया कारण बताओ नोटिस
मामले में जानकारी समय-सीमा में उपलब्ध नहीं कराने को लेकर तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी जगन्नाथ मरकाम को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20(1) के तहत शास्ति अधिरोपित किए जाने तथा धारा 20(2) के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा किए जाने के संबंध में उनका पक्ष मांगा।
19 जून 2026 की सुनवाई में तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी की ओर से बताया गया कि आवेदन के कुछ बिंदुओं से संबंधित जानकारी बाद में उपलब्ध कराई जा चुकी है। हालांकि आयोग के समक्ष प्रस्तुत स्पष्टीकरण में मामले की स्थिति और जानकारी उपलब्ध कराने में हुई देरी को लेकर पूर्ण विवरण स्पष्ट नहीं होने पर अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए।
– चोट के कारण व्यक्तिगत सुनवाई में नहीं हो सके उपस्थित
22 जुलाई 2026 की सुनवाई में तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी की ओर से ई-मेल के माध्यम से जवाब प्रस्तुत किया गया। इसमें बताया गया कि खेल के दौरान उनके बाएं हाथ में गंभीर चोट आई है और हाथ में प्लास्टर बंधा होने के कारण वे व्यक्तिगत सुनवाई में उपस्थित नहीं हो सके। उन्होंने आयोग से प्रस्तुत लिखित पक्ष के आधार पर मामले का निराकरण करने अथवा व्यक्तिगत सुनवाई के लिए आगामी तिथि निर्धारित करने का अनुरोध किया।

– आयोग ने माना- जानकारी समय पर उपलब्ध कराना था जरूरी
मामले की सुनवाई और उपलब्ध दस्तावेजों के परीक्षण के बाद आयोग ने माना कि अपीलार्थी द्वारा आवेदन के बिंदु क्रमांक-3 में मांगी गई जानकारी शिकायतों, उन पर हुई कार्रवाई और विभागीय जांच से संबंधित थी। आयोग के अनुसार यह जानकारी ऐसी थी, जिसे कानून के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध कराया जाना चाहिए था।
आयोग ने यह भी माना कि यदि किसी अभिलेख में तृतीय पक्ष की व्यक्तिगत या गोपनीय जानकारी मौजूद थी तो संबंधित अंश को हटाकर अथवा पृथक करके शेष जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती थी। पूरी जानकारी को रोकने का आधार पर्याप्त नहीं माना गया।
– धारा 7 के उल्लंघन पर लगाया ₹10 हजार का जुर्माना
आयोग ने अपने आदेश में निष्कर्ष निकाला कि 12 अप्रैल 2023 को मांगी गई जानकारी समयावधि में उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 7 का उल्लंघन हुआ।
इसी आधार पर सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20(1) के तहत तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी एवं तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जगन्नाथ मरकाम पर 10,000 रुपये की शास्ति अधिरोपित की गई है।
आयोग ने निर्देश दिया कि यह राशि एक माह के भीतर सचिव, मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग, भोपाल के नाम देय बैंक ड्राफ्ट अथवा चालान के माध्यम से निर्धारित शासकीय खाते में जमा की जाए तथा इसकी प्रति के साथ पालन प्रतिवेदन आयोग में प्रस्तुत किया जाए।
– राशि जमा नहीं हुई तो वेतन से कटौती की कार्रवाई
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित अवधि में शास्ति राशि जमा नहीं की जाती है तो मध्यप्रदेश सूचना का अधिकार (अपील तथा फीस) नियम, 2005 के संबंधित प्रावधानों के अनुसार वेतन से कटौती कर शास्ति राशि आयोग को जमा कराने की कार्रवाई की जा सकती है।
– 21 अगस्त को फिर होगी सुनवाई
शास्ति राशि जमा किए जाने के पालन प्रतिवेदन के लिए आयोग ने 21 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजे अगली सुनवाई निर्धारित की है। संबंधित पक्षकारों को आदेश की प्रति भेजे जाने के निर्देश भी दिए गए हैं।







