भोपाल। पुलिस मुख्यालय भोपाल में आयोजित दो दिवसीय जोनल एडीजी एवं आईजी की त्रैमासिक समीक्षा बैठक संपन्न हो गई। बैठक की अध्यक्षता मध्यप्रदेश पुलिस के महानिदेशक (DGP) श्री कैलाश मकवाणा ने की। इस दौरान प्रदेश में अपराध नियंत्रण, न्यायालयीन प्रकरणों, प्रशासनिक व्यवस्थाओं, मानव संसाधन प्रबंधन, पुलिस आधुनिकीकरण एवं नशा मुक्ति अभियान सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में प्रदेश के सभी जोनल एडीजी, आईजी, विशेष सशस्त्र बल (SAF) जोनों के अधिकारी तथा पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य पुलिस विभाग की उपलब्धियों, चुनौतियों और आगामी कार्ययोजना का मूल्यांकन कर प्रभावी एवं जवाबदेह पुलिसिंग के लिए नई रणनीति तैयार करना था।
DGP श्री कैलाश मकवाणा ने अधिकारियों को सुशासन, जवाबदेही, पारदर्शिता एवं जनकेंद्रित पुलिसिंग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रदेश को ड्रग फ्री बनाने के लिए पुलिस को और अधिक सक्रिय एवं परिणामोन्मुखी कार्रवाई करनी होगी। इसी उद्देश्य से आगामी 15 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक प्रदेश के सभी जिलों में “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” विशेष जन-जागरूकता एवं प्रवर्तन अभियान संचालित किया जाएगा।
बैठक के दौरान मध्यप्रदेश स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB) द्वारा प्रस्तुत अपराध विश्लेषण की गहन समीक्षा की गई। इसमें महिलाओं के विरुद्ध अपराध, हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, मॉब लिंचिंग जैसी गंभीर घटनाओं की जोनवार एवं जिलावार स्थिति का आकलन किया गया। अधिकारियों ने अपराध नियंत्रण के लिए अपनाई जा रही रणनीतियों और आवश्यक सुधारात्मक उपायों पर भी चर्चा की।
न्यायालयीन मामलों की समीक्षा करते हुए उच्च न्यायालय में लंबित प्रकरणों, अवमानना याचिकाओं, सेवा संबंधी दावों, रिट याचिकाओं, स्थगन आदेशों तथा समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत करने की स्थिति पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। DGP ने सभी अधिकारियों को न्यायालयीन मामलों की सतत निगरानी रखते हुए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े लंबित मामलों एवं विभिन्न संवर्गों के कर्मचारियों के प्रशासनिक प्रकरणों की भी समीक्षा की गई। साथ ही सूबेदार, निरीक्षक एवं रक्षित निरीक्षक स्तर के अधिकारियों के बुनियादी प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रगति पर चर्चा की गई।
एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत पिछले छह माह में की गई कार्रवाई, चिन्हित ड्रग हॉटस्पॉट क्षेत्रों, मादक पदार्थों के विनिष्टीकरण, अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई, अंतरराज्यीय बॉर्डर मीटिंग्स तथा नशा मुक्ति जागरूकता अभियानों की समीक्षा भी बैठक का प्रमुख विषय रही। अधिकारियों ने बताया कि 10 महत्वपूर्ण प्रकरणों में लगभग 53 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति फ्रीज की गई है, जो मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
बैठक में पुलिस प्रशिक्षण की कार्ययोजना, मास्टर ट्रेनर व्यवस्था तथा iGOT पोर्टल पर अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा पाठ्यक्रम पूर्ण करने की प्रगति की भी समीक्षा की गई। DGP ने नई तकनीकों, साइबर अपराध नियंत्रण एवं आधुनिक पुलिसिंग से जुड़े प्रशिक्षणों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
इसके अलावा वित्तीय प्रबंधन, मुख्यमंत्री पुलिस आवास योजना के तहत निर्माणाधीन आवासों की प्रगति, प्रशासकीय भवनों के निर्माण, पुलिस वाहनों की खरीद तथा पुलिस आधुनिकीकरण योजनाओं की समीक्षा की गई। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में लंबित शिकायतों, सीएम हेल्पलाइन एवं अन्य जन-अभियोगों के निराकरण की स्थिति पर भी अधिकारियों से जानकारी ली गई।
बैठक के दौरान प्रदेश के 49 जिलों को उपलब्ध कराए गए एफएसएल उपयोगी विशेष वाहनों पर आधारित एक वीडियो फिल्म का प्रदर्शन किया गया। इसमें वैज्ञानिक अनुसंधान, फोरेंसिक जांच एवं अपराध विवेचना को अधिक प्रभावी बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को दर्शाया गया।
दो दिवसीय समीक्षा बैठक के समापन पर पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने कहा कि तकनीक आधारित पुलिसिंग, मानव संसाधन प्रबंधन, प्रशासनिक सुधार, प्रशिक्षण एवं अपराध विश्लेषण को और अधिक मजबूत बनाकर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने सभी अधिकारियों से जनता के प्रति संवेदनशील, पारदर्शी और जवाबदेह पुलिस व्यवस्था सुनिश्चित करने का आह्वान किया।










