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डिंडौरी में सिंचाई का सच: हजारों करोड़ खर्च, बांध सूखे और किसान प्यासे!

akvlive.in

Published

– कागजों में 64 हजार हेक्टेयर सिंचाई, जमीन पर बदहाल व्यवस्था 

डिंडौरी न्यूज। केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य तय किया गया था, जिसके तहत किसानों के खेतों तक सिंचाई हेतु पानी पहुंचाने के नाम हज़ारो करोड़ रुपए खर्च कर सैकड़ों बांध और डायवर्सन के निर्माण कार्य जल संसाधन विभाग द्वारा कराए गए हैं। लेकिन विभाग द्वारा कराए गए तमाम निर्माण कार्य महज सफेद हाथी बनकर रह गए हैं, विभाग द्वारा बनाए गए करोड़ों की संरचना ढहने की कगार पर है और कुछ संरचना सिर्फ दिखावा बनकर रह गए है। जल संसाधन विभाग के अधिकारी और ठेकेदारों ने मिलकर बांध और नहर निर्माण कार्य के नाम पर जमकर खेल करते हुए शासन को पलीता लगाया है, जिसके चलते न तो बांधो में पानी रुक रहा है और न ही किसानों को सिंचाई की सुविधा.? वहीं दूसरी और विभाग के आंकड़ों में रबी और खरीब सीजन में भूमि सिंचित किए जाने का दर्ज सफेद झूठ देखा जा सकता हैं। जल संसाधन द्वारा जारी किए गए विभागीय दावों के अनुसार 97 बांध /जलाशयों से खरीफ सीजन में 12764 हेक्टेयर तो वहीं रबी सीजन में 28829 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित किया जा रहा हैं, माध्यम सिंचाई परियोजना से रबी सीजन में 36000 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित किए जाने का लक्ष्य तय किया गया है, जबकि धरातल में स्थिति बद से बदतर है।

– आर्थिक और बुनियादी तौर देश का सबसे पिछड़ा डिंडौरी

गौर तलब है पूरे देश में आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले की पहचान आर्थिक और बुनियादी तौर पर पिछड़े जिले की तौर पर होती है, 2011 के आर्थिक और जातिगत जनगणना में डिंडौरी जिले की स्थिति पूरे देश में जगजाहिर हुई थी। पलायन, मजदूरी ,सरकारी योजनाओं और प्राकृतिक आश्रित खेती पर जिले के लोगों की अर्थव्यवस्था टिकी हुई है, यदि विभाग में दर्ज आंकड़ों के अनुसार किसानों के भूमि सिंचित किए जाते तो डिंडौरी की आर्थिक और आधुनिक विकास की तस्वीर कुछ और ही होती। जनप्रतिनिधि और अधिकारियों की कमाओं खाओ कि नीति के चलते शासन की मंशा महज आंकड़ों में सिमट कर रह गई है। समूचे जिले में आमजन पेयजल के लिए त्राहि त्राहि है , ऐसे हालातों में अब सिंचाई की उम्मीदें बेईमानी होगी।

– इन बांध/जलाशयों से हजारों हेक्टेयर भूमि सिंचित किए जाने का दावा..! 

बिलगांव मध्यम परियोजना से 9980 हेक्टेयर , डिंडौरी जलाशय से 97, रंहगी जलाशय से 121, रयपुरा जलाशय से 153, लाखों टैंक से 184 , जमुनिया है एनीकेट से 30, सारसताल जलाशय से 166 टिकरिया जलाशय से 140, घानामार जलाशय से 263, डांडविदय जलाशय से 260, लमान टोला जलाशय से 127, धूर्रा जलाशय से 92, उदार जलाशय से 134, सिलघाटी जलाशय से 166, टिकरिया जलाशय से 385, नागदमन जलाशय से 425 , भरद्वारा जलाशय से 444, सारंगपुर पड़रिया जलाशय से 470 , चटूवा हाई लेवल टैंक से 176, गोपालपुर जलाशय से 550, रकरिया जलाशय से 350, गोरखपुर जलाशय से 995, गोयरा जलाशय से 310 भाबरखडी जलाशय से 435, पाकर बघरा जलाशय से 619,फतेहपुर जलाशय से 333, खजरी टोला जलाशय से 113, दनदना नाला  जलाशय से 1950 , कुकर्रा जलाशय से 585 , मोहदा जलाशय से 336, पड़रिया जलाशय से 143 , नेवसा जलाशय से 236 , बरगांव जलाशय से 264, किकरिया जलाशय से 40, भाजी टोला एनीकेट से 405, बरगी जलाशय से 340, देवलपुर जलाशय से 77 केवलारी जिला से 141 सुंदरपुर डायवर्सन स्कीम से 720, कचनारी डायवर्सन स्कीम से 340, खम्ही डायवर्सन स्कीम से 590 ,रनगांव जलाशय से 206,पिंडरूखी डायवर्सन स्कीम से 512, सुनियामार जलाशय से 210, गीधा जलाशय से 61, बोंदर नाला एनिकट से 102, सुरसा टोला जलाशय से 111हेक्टेयर, लबैदा एनीकट से 142, ढोंढ जलाशय से 126, दुल्लोपुर जलाशय से 133 , तरच एनिकट से 685, करौंदा जलाशय से 125 हेक्टेयर, बिलाईखार जलाशय से 105, खरगहना जलाशय से 121, नीम टोला डायवर्सन स्कीम से 495, ग्वारा जलाशय से 295, लालपुर जलाशय से 123, रतना जलाशय से 127, करनाई नाला से 48, रामनगर जलाशय से 195, अमरपुर जलाशय से 154, बहेरा जलाशय से 85, बंजर टोला जलाशय से 125, बरगा टोला जलाशय से 425, पाखा टोला जलाशय से 40, धनवासी सालिड बियर से 325, भैंसवाही सालिड बियर 320, बांका टोला सालिड वियर 330, भापसा सालिड वियर 285, भगनवारा जलाशय 186, भाखा डायवर्सन स्कीम 875, मुरता जलाशय 357, खुड़िया डायवर्सन 728, संग्रामपुर एनीकेट 65, दलका बंदा जलाशय से 425, पड़रिया 481, उमरिया जलाशय 188, कूटदर जलाशय 218, बस्तरा जलाशय 200, कोडिया जलाशय 199, चौरा जलाशय 344, देवरी जलाशय 147, कोहानी देवरी जलाशय 91, धनगांव जलाशय 144, सराई 94, टिकरिया जलाशय 273, डोभी 194, राछो 112, कछारी 157, कहींजरा 105, बरगांव वियर 155, बड़झर 140, सरवाही 44, मोहरा पहारुआ 252, चंदवाही जलाशय 157, घुंडी सराई 162, सारस डोली जलाशय से 1515 हेक्टेयर भूमि सिंचित किए जाने का दावा किया जा रहा है।

– करोड़ों के बांध/जलाशय सूखे, जिम्मेदार कौन

जिले में करोड़ों की लगात से कराए गए दर्जनों बांध गर्मी के आमद से पहले ही सूख जाते हैं जबकि बांधों मकी जल भराव क्षमता मिलियन क्यूबिक मीटर से भी अधिक है। वर्षा जल रोकना दूर की बात है, कई बांध और जलाशयों में जीवित नदी की पानी तक नहीं रुक रहा है। जिसका जीता जागता उदाहरण 7 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित सुंदरपुर डायवर्सन स्कीम, खुड़िया डायवर्सन स्कीम, मुरता जलाशय, बरगी जलाशय, पड़रिया जलाशय,केवलारी जलाशय, अमरपुर जलाशय सहित दर्जनों बांध पूरी तरह सूख गए हैं। 2010 में अमरपुर जनपद अंतर्गत भगनवारा में 6 करोड़ रुपए की लागत से बनाए गए जलाशय की मुख्य बंड में दरार आने से अनुपयोगी साबित हो रही है।

– बांध और नहर मरम्मत के नाम पर जारी है करोड़ों रुपए बंदरबांट का खेल

जल संसाधन विभाग के अधीन सैकड़ों बांधो एवं नहरों की मरम्मत कार्यों के लिए अनुरक्षण मद में प्रतिवर्ष प्रत्येक जलाशय के नाम पर लाखों रुपए आवंटित किए जाते हैं, लेकिन मरमत के नाम पर सिर्फ आवंटित राशि का बंदरबाट करने हेतु सिर्फ कागजी खानापूर्ति का खेल खेला जा रहा है। जल संसाधन विभाग द्वारा वर्ष 2021-22 में नहर सफाई एवं मरम्मत कार्य हेतु मनेरगा अंतर्गत 313 कार्यों के लिए 31 करोड़ 8लाख रुपए जारी किया गया था, लेकिन अधिकारियों ने नियम प्रक्रिया को ताक में रखकर सिर्फ और सिर्फ फर्जी बिलो के जरिए राशि का बंटाढार कर दिया जिससे बांधो नहरों की स्थिति जस की तस बनी हुई है।

– जल संरक्षण का अलख जगाने युद्ध स्तर पर जारी है कार्य

इन दिनों जल संरक्षण के नाम पर जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जल संरक्षण का अलख जगाने जिला प्रशासन द्वारा गांव,गली तक पहुंच कर जनता को जागरूक किया जा रहा। जल ही जीवन है, के नारे को धरातल पर लागू करने के लिए कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया के नेतृत्व में शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, पीएचई, आबकारी, राजस्व, आजीविका सहित तमाम अमला जल संरचना का निर्माण करा केंद्र सरकार के जल संचय पोर्टल पर लाखों की संख्या में फोटो अपलोड करने पर जुटा हुआ है।

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..