– सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर जताई चिंता, हत्या के मामलों की जांच और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर भी उठाए सवाल; जिले में पुलिस की निष्पक्षता को लेकर फिर तेज हुई बहस
डिंडौरी न्यूज। डिंडौरी जिले में कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बार सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने स्वयं सोशल मीडिया के माध्यम से पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विधायक ने वीडियो जारी करते हुए दावा किया कि जिले से 250 से अधिक युवतियां लापता हैं, जो अत्यंत गंभीर और चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में प्रभावी कार्रवाई के बजाय पुलिस और अधिकारी निष्क्रिय दिखाई दे रहे हैं।
विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि जिले में कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं। बड़ी संख्या में युवतियों के लापता होने के मामलों की प्रभावी एवं त्वरित जांच होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इन मामलों की उच्चस्तरीय समीक्षा कर दोषियों के खिलाफ शीघ्र और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने धवाडोंगरी की हालिया गंभीर घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि घटना जिला मुख्यालय से अधिक दूर नहीं होने के बावजूद यदि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्वयं घटनास्थल पर नहीं पहुंचते हैं तो इससे आम लोगों में असंतोष स्वाभाविक है। विधायक ने इसे पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न बताया।
विधायक ने अपने विधानसभा क्षेत्र में हुई एक हत्या की घटना का भी जिक्र करते हुए कहा कि मामले की जांच और कार्रवाई की गति संतोषजनक नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता की अपेक्षा है कि प्रत्येक गंभीर अपराध में पुलिस तत्काल कार्रवाई करे, वरिष्ठ अधिकारी स्वयं घटनास्थल का निरीक्षण करें तथा निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें। उनके अनुसार जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और पुलिस प्रशासन को इस दिशा में अधिक संवेदनशील एवं जवाबदेह बनने की आवश्यकता है।
इधर जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर लंबे समय से असंतोष की स्थिति बनी हुई है। हत्या, हत्या के प्रयास, मारपीट और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों में पीड़ित पक्ष द्वारा निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होने के आरोप समय-समय पर सामने आते रहे हैं। कई मामलों में पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें न्याय के लिए विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जबकि आरोपित प्रभावशाली लोगों के संरक्षण या कथित पुलिस सांठगांठ के कारण कार्रवाई से बच निकलते हैं।
सूत्रों के अनुसार जिले में कथित तौर पर “काउंटर केस” दर्ज करने की प्रवृत्ति भी बढ़ी है। आरोप है कि कई विवादों में पुलिस शिकायतकर्ता और आरोपित दोनों पक्षों के विरुद्ध एक साथ प्रकरण दर्ज कर देती है, जिससे वास्तविक पीड़ित को न्याय मिलने में कठिनाई होती है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल किसी विपक्षी दल के नेता ने नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ भाजपा के वरिष्ठ विधायक ने सार्वजनिक रूप से उठाए हैं। ऐसे में जिले की कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विधायक द्वारा उठाए गए मुद्दों पर जिला पुलिस प्रशासन और शासन किस प्रकार प्रतिक्रिया देता है तथा लापता युवतियों के मामलों और अन्य गंभीर अपराधों की जांच को लेकर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।







