– छोटे गुर्गे गिरफ्तार, बड़ा सरगना फरार! अवैध शराब नेटवर्क पर बड़े सवाल
– राजनैतिक संरक्षण में फल-फूल रहा अवैध शराब सिंडिकेट, छोटे गुर्गों पर कार्रवाई, सरगना बेखौफ
डिंडौरी न्यूज । नर्मदा तट की पवित्रता बनाए रखने और श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करने के उद्देश्य से तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मां नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान नर्मदा नदी के पांच किलोमीटर दायरे में शराब विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध की घोषणा की थी। डिंडौरी की धरती से हुई इस ऐतिहासिक घोषणा के बाद शराब दुकानों के लाइसेंस निरस्त कर दिए गए थे, लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि जिला मुख्यालय में खुलेआम अवैध शराब का कारोबार शासन की मंशा को चुनौती देता दिखाई दे रहा है।
सूत्रों के अनुसार डिंडौरी नगर में प्रतिदिन लाखों रुपये की अवैध शराब खपाई जा रही है। पान गुमटियों, किराना दुकानों, बस स्टैंड, पुरानी डिंडौरी तिराहा, सुबखार, मस्जिद मोहल्ला, मंडला बस स्टैंड, कलेक्ट्रेट क्षेत्र, नर्मदा गंज सहित दर्जनों स्थानों पर दिन-रात शराब की बिक्री जारी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब यह कारोबार खुलेआम चल रहा है तो जिम्मेदार विभागों की नजर आखिर इस पर क्यों नहीं पड़ रही?

– सफेदपोशों के संरक्षण में अवैध कारोबार!
जानकार सूत्र बताते हैं कि शराबबंदी की आड़ में कुछ राजनीतिक रसूखदारों ने अवैध शराब को कमाई का बड़ा जरिया बना लिया है। आरोप हैं कि प्रति बोतल बिक्री पर कमीशन लेकर शहर भर में शराब बिकवाई जा रही है। इतना ही नहीं, कार्रवाई की भनक लगते ही कारोबारियों को बचाने और मामलों को दबाने का खेल भी चल रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि समय-समय पर कार्रवाई जरूर होती है, लेकिन वह केवल छोटे विक्रेताओं या कथित गुर्गों तक सीमित रहती है। अवैध कारोबार का संचालन करने वाले मुख्य सरगना और उनके संरक्षक कानून की पकड़ से दूर बने हुए हैं।
– भाजपा नेताओं में भी नाराजगी
शहर में शराबबंदी के बावजूद खुलेआम बिक रही शराब को लेकर भाजपा के कई कार्यकर्ता और नेता भी अंदरखाने नाराज बताए जा रहे हैं। हालांकि सत्ता पक्ष से जुड़े होने के कारण अधिकांश लोग सार्वजनिक रूप से विरोध दर्ज कराने से बच रहे हैं। उनका मानना है कि सरकार की छवि को सबसे ज्यादा नुकसान ऐसे ही अवैध कारोबार पहुंचा रहे हैं।
– मिलावटखोरी का खतरनाक खेल
मामला केवल अवैध बिक्री तक सीमित नहीं है। सूत्रों के मुताबिक नगर में बिक रही शराब में बड़े पैमाने पर मिलावट किए जाने की आशंका भी जताई जा रही है। बताया जाता है कि शराब की बोतलों से मात्रा निकालकर उसमें संदिग्ध रसायनों की मिलावट की जाती है और निकाली गई शराब को दूसरी बोतलों में भरकर बेचा जाता है। यदि यह आरोप सही हैं तो यह केवल कानून का उल्लंघन नहीं बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ भी है। जहरीली शराब या रासायनिक मिश्रण से कभी भी बड़ी जनहानि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

– सवालों के घेरे में प्रशासन
नगर में दर्जनों स्थानों पर अवैध शराब की बिक्री की चर्चाएं आम हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या जिम्मेदार विभागों को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही? यदि शराबबंदी लागू है तो फिर शराब की आपूर्ति कहां से हो रही है और इसका नेटवर्क कौन संचालित कर रहा है?
नगर के प्रबुद्ध नागरिक अब मांग कर रहे हैं कि प्रशासन केवल छोटे विक्रेताओं पर कार्रवाई करने के बजाय पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कर मुख्य सरगनाओं और उनके कथित संरक्षकों तक पहुंचे, ताकि नर्मदा तट पर लागू शराबबंदी का वास्तविक उद्देश्य पूरा हो सके।












