– 2010 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से छूट देने और पुरानी पेंशन बहाल करने की उठी मांग
डिंडौरी। आजाद अध्यापक शिक्षक संघ के प्रांतीय आह्वान एवं कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के बैनर तले रविवार को डिंडौरी में हजारों शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के विरोध में एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन एवं उपवास किया। जिला मुख्यालय स्थित पोस्ट ऑफिस के समीप आयोजित आंदोलन में जिले के सभी विकासखंडों से महिला एवं पुरुष शिक्षक शामिल हुए। शिक्षकों ने 2010 के पूर्व नियुक्त प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षकों को TET से छूट देने तथा पुरानी पेंशन योजना पुनः बहाल करने की मांग उठाई।
आजाद अध्यापक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष देवेंद्र दीक्षित ने कहा कि प्रदेश के सभी 55 जिलों में संगठन के आह्वान पर एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आंदोलन का प्रमुख उद्देश्य वर्ष 2010 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से मुक्त रखने तथा पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग शासन तक पहुंचाना है।

शिक्षकों का कहना है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति शासन द्वारा निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया एवं विज्ञापन के माध्यम से हुई थी, उनसे करीब 25 से 30 वर्ष की सेवा के बाद पात्रता परीक्षा लेना उचित नहीं है। कई शिक्षक अब 50 वर्ष से अधिक आयु के हो चुके हैं। शिक्षकों ने सवाल उठाया कि लंबे समय तक शासकीय सेवा करने और विभागीय दायित्वों का निर्वहन करने के बाद अब उन्हें पात्रता परीक्षा के दायरे में क्यों लाया जा रहा है।
– नियुक्ति प्रक्रिया और पूर्व पात्रता परीक्षा का दिया हवाला
आंदोलनरत शिक्षकों ने कहा कि मध्यप्रदेश में वर्ष 2005 से 2009 के बीच व्यापमं के माध्यम से आयोजित पात्रता परीक्षाएं उत्तीर्ण करने के बाद भी अनेक शिक्षकों की नियुक्तियां हुई हैं। इनमें से कई शिक्षक पदोन्नति भी प्राप्त कर चुके हैं। ऐसे में वर्षों पुरानी नियुक्तियों और पदोन्नति के बाद पुनः TET की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों ने असमंजस और चिंता व्यक्त की। शिक्षकों का यह भी कहना है कि शिक्षा विभाग द्वारा अभी तक स्पष्ट सूची जारी नहीं की गई है कि किन-किन शिक्षकों को पात्रता परीक्षा के दायरे में शामिल किया जाएगा। इसी को लेकर शिक्षकों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
– तमिलनाडु की तर्ज पर विधानसभा में प्रस्ताव की मांग
आजाद अध्यापक शिक्षक संघ ने तमिलनाडु सरकार द्वारा 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट देने के संबंध में विधानसभा से प्रस्ताव पारित किए जाने का हवाला देते हुए मध्यप्रदेश में भी इसी प्रकार की पहल करने की मांग की। शिक्षकों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से ज्ञापन के माध्यम से मांग की कि विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर 2010 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट प्रदान की जाए।
आंदोलन में शामिल शिक्षकों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि पात्रता परीक्षा को लेकर निर्धारित समयसीमा में परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करने वाले शिक्षकों के भविष्य और सेवा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। शिक्षकों के अनुसार प्रदेश में लगभग डेढ़ लाख शिक्षक TET के दायरे में बताए जा रहे हैं।
– पुरानी पेंशन बहाली की भी उठी मांग
धरना-प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने पुरानी पेंशन योजना को पुनः बहाल करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई। शिक्षकों का कहना था कि लंबे समय से सेवा कर रहे कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए शासन को पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने पर निर्णय लेना चाहिए।
इस दौरान कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के जिला अध्यक्ष रवि तेकाम, शिक्षक संघ डिंडौरी के जिला अध्यक्ष महेंद्र सिंह उद्दे, लिपिक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रत्नेश नामदेव, लघु वेतन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष प्रकाश चंदेल सहित जिलेभर से आए बड़ी संख्या में शिक्षक एवं कर्मचारी मौजूद रहे। प्रदर्शन के बाद शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपते हुए TET की अनिवार्यता समाप्त करने और पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग दोहराई।
