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निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता नहीं, समय-सीमा में पूर्ण करें कार्य : कलेक्टर 

एडीटर: Chetram Rajpoot September 19, 2026

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– कलेक्टर ने निर्माण एजेंसियों को दिए गुणवत्तापूर्ण एवं टिकाऊ निर्माण के निर्देश, नवीन भवनों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग और सुरक्षित विद्युत व्यवस्था अनिवार्य

डिंडौरी न्यूज। जिले में संचालित निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति को लेकर कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया ने निर्माण एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं और गुणवत्ता के साथ किसी भी स्तर पर समझौता न हो। कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठक में विभिन्न विभागों के माध्यम से संचालित निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई।

कलेक्टर ने कहा कि निर्माण कार्यों में उच्च गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग सुनिश्चित किया जाए। राशि की बचत के नाम पर निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शासकीय भवनों का निर्माण इस प्रकार किया जाए कि वे लंबे समय तक उपयोगी और टिकाऊ रहें। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद यदि गुणवत्ता संबंधी गड़बड़ी सामने आती है तो उसे दोबारा सुधारना अथवा भवन का पुनर्निर्माण करना कठिन होता है, इसलिए शुरुआत से ही गुणवत्ता के निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

– नवीन भवनों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग पर जोर

कलेक्टर ने सभी नवीन भवनों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही भवनों में पानी की टंकी एवं स्टैंड की समुचित व्यवस्था, छत की नियमित साफ-सफाई तथा गीले एवं सूखे कचरे के पृथक्करण और उसके उचित प्रबंधन की व्यवस्था करने को कहा।

उन्होंने निर्देश दिए कि भवनों में कहीं भी पानी का ठहराव अथवा निकासी की समस्या नहीं होनी चाहिए। भवन निर्माण के दौरान जल निकासी और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि भविष्य में भवनों को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे।

– भवनों में एकरूपता और बेहतर गुणवत्ता पर जोर

कलेक्टर ने नवीन शासकीय भवनों की बाहरी दीवारों पर टाइल्स लगाने की संभावनाओं पर भी विचार करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी नवीन भवनों में एकरूपता के लिए समान रंग-रूप की पेंटिंग कराने पर जोर दिया। साथ ही दरवाजे और खिड़कियां उच्च गुणवत्ता की लगाने के निर्देश देते हुए कहा कि शासकीय भवनों की गुणवत्ता और रखरखाव से प्रशासन की कार्यप्रणाली एवं छवि भी प्रभावित होती है।

उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य पूर्ण होने और गुणवत्ता सुनिश्चित होने के बाद ही संबंधित निर्माण एजेंसी को भुगतान किया जाए। निर्माण की गुणवत्ता की जांच और आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण किए बिना भुगतान नहीं किया जाए।

– सामुदायिक भवनों और आंगनवाड़ी भवनों पर विशेष ध्यान

सामुदायिक भवनों के निर्माण में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश देते हुए कलेक्टर ने कहा कि भवन ऐसे हों, जहां समुदाय और आमजन सहजता से बैठ सकें तथा आवश्यकता के अनुसार उनका उपयोग किया जा सके। जिन भवनों के निर्माण कार्य अभी प्रारंभ नहीं हुए हैं, उन्हें शीघ्र प्रारंभ कर कार्य की गति बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए।

आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण में बच्चों की सुरक्षा और उनकी आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने कहा कि आंगनवाड़ी भवनों के लिए ऐसे स्थानों का चयन किया जाए, जहां बच्चों के आवागमन की पर्याप्त सुविधा हो और भवन उनके लिए सुरक्षित एवं सुविधाजनक हो।

– अतिक्रमण की वजह से निर्माण न रुके

कलेक्टर ने कहा कि यदि किसी निर्माण कार्य में अतिक्रमण के कारण बाधा उत्पन्न हो रही है तो संबंधित अधिकारी प्रशासन से समन्वय स्थापित कर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित करें। निर्माण कार्य केवल इस कारण लंबित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आवश्यक कार्रवाई समय पर पूरी कर निर्माण कार्य निर्धारित अवधि में प्रारंभ एवं पूर्ण कराया जाए।

– सुरक्षित विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश

नवीन भवनों में विद्युत व्यवस्था को लेकर भी कलेक्टर ने निर्माण एजेंसियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्युत कार्य उच्च गुणवत्ता के मानकों के अनुरूप कराया जाए तथा शॉर्ट सर्किट जैसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सुरक्षित एवं व्यवस्थित विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

कलेक्टर ने निर्माण एजेंसियों से कहा कि प्रत्येक निर्माण कार्य को केवल निर्धारित समय में पूरा करना ही उद्देश्य न हो, बल्कि उसकी गुणवत्ता, उपयोगिता, सुरक्षा और भविष्य की आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखा जाए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य एक बार पूरा होने के बाद उसमें बड़ी खामी सामने आने पर दोबारा निर्माण करना संभव नहीं होता, इसलिए निर्माण के प्रत्येक चरण में गुणवत्ता और मानकों का विशेष ध्यान रखा जाना आवश्यक है।

एडीटर

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत ‘मध्यभूमि के बोल’ के संपादक हैं और दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के खुलासे और जमीनी खोजी पत्रकारिता के लिए उनकी पहचान है।...

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