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समनापुर में दसवीं के आदिवासी छात्र पर चाकू से हमले के विरोध में निकाली रैली : GSU ने उठाए सुरक्षा पर सवाल

एडीटर: Chetram Rajpoot September 17, 2026

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– कलेक्टर के नाम सौंपे ज्ञापन में निष्पक्ष जांच, आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई और स्कूल में पुलिस सुरक्षा की मांग

डिंडौरी। जिले के समनापुर विकासखंड मुख्यालय में संचालित शासकीय विद्यालय में कक्षा दसवीं में अध्ययनरत अनुसूचित जनजाति वर्ग के एक छात्र के साथ विगत दिनों कथित चाकूबाजी और गाली-गलौज का मामला सामने आया था । घटना को लेकर गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन (GSU), डिंडौरी ने जिला कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले में निष्पक्ष जांच, आरोपियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई तथा विद्यालय में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक व्यवस्था किए जाने की मांग की है।

ज्ञापन के अनुसार, 5 सितंबर 2026 को समनापुर क्षेत्र में कक्षा दसवीं के छात्र सतीश मरावी के साथ तीन छात्रों द्वारा कथित रूप से चाकू से हमला किया गया। संगठन द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में उल्लेख है कि घटना के बाद क्षेत्र के विद्यार्थियों और अभिभावकों में भय का माहौल है तथा स्कूल में अध्ययनरत बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

– घटना से आदिवासी क्षेत्र में भय का माहौल होने का दावा

GSU ने अपने ज्ञापन में कहा है कि समनापुर विकासखंड एवं जिला डिंडौरी का क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्र में आता है। संगठन ने राज्यपाल को प्रदत्त संवैधानिक शक्तियों का उल्लेख करते हुए अनुसूचित क्षेत्र में आदिवासी छात्र-छात्राओं की सुरक्षा के लिए विशेष प्रशासनिक एवं विधिक व्यवस्थाओं की समीक्षा की मांग की है।

ज्ञापन में कहा गया है कि दिनदहाड़े स्कूली छात्र के साथ हुई कथित चाकूबाजी की घटना से स्कूल में पढ़ने वाले अन्य छात्र-छात्राएं भी डरे हुए हैं। संगठन ने आशंका जताई है कि ऐसी घटनाओं से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ-साथ उनके मन में असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है।

– FIR दर्ज करने में देरी का भी आरोप

संगठन ने पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि घटना के बाद तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं की गई, जबकि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए थी। पत्र में दावा किया गया है कि छात्र के पिता के अस्पताल से लौटने के बाद रात में एफआईआर दर्ज की गई।

GSU ने इस पूरे घटनाक्रम की जांच कर यह निर्धारित किए जाने की मांग की है कि एफआईआर दर्ज करने में देरी क्यों हुई और क्या किसी स्तर पर कर्तव्य में लापरवाही हुई। साथ ही एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम एवं संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई तथा पीड़ित को नियमानुसार राहत एवं विधिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

– धाराएं बढ़ाने और निष्पक्ष जांच की मांग

ज्ञापन में घटना की गंभीरता को देखते हुए मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 सहित अन्य उपयुक्त धाराएं जोड़े जाने की मांग की गई है। इसके साथ ही अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत लागू प्रावधानों में कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है।

संगठन ने स्पष्ट रूप से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ताकि घटना के वास्तविक तथ्यों का पता लगाया जा सके और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित आरोपियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई हो।

– स्कूल प्रशासन की भूमिका पर भी उठे सवाल

GSU ने ज्ञापन में स्कूल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि इतनी गंभीर घटना विद्यालय परिसर या स्कूल से जुड़े क्षेत्र में होने के बाद अन्य विद्यार्थियों में भय का वातावरण बना हुआ है। संगठन ने मांग की है कि आरोपियों के संबंध में विद्यालय स्तर पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए स्कूल में पुलिस सुरक्षा तैनात की जाए। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि घटना के संबंध में पीड़ित परिवार से संपर्क कर उसकी वर्तमान स्थिति की जानकारी ली जाए तथा प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

– राज्यपाल से लेकर पुलिस और जनजातीय कार्य विभाग तक भेजी प्रतियां

GSU द्वारा सौंपे गए ज्ञापन की प्रतियां मध्यप्रदेश के राज्यपाल, मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष, पुलिस अधीक्षक डिंडौरी, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, तहसीलदार समनापुर, थाना प्रभारी समनापुर तथा GSU मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष को भी भेजी गई हैं।

संगठन ने प्रशासन से 15 दिवस के भीतर उचित कार्रवाई किए जाने की मांग की है। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर गोंडवाना स्टूडेंट्स यूनियन के माध्यम से आंदोलन किया जाएगा।

 

 

एडीटर

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत ‘मध्यभूमि के बोल’ के संपादक हैं और दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के खुलासे और जमीनी खोजी पत्रकारिता के लिए उनकी पहचान है।...

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