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पुलिया निर्माण में स्थल चयन से मूल्यांकन तक लापरवाही : उपयंत्री पर गिरी निलंबन की गाज

एडीटर: Chetram Rajpoot September 16, 2026

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– शिवनार नाले पर बनी पुलिया बार-बार क्षतिग्रस्त, स्थल चयन से लेकर मूल्यांकन और सत्यापन में मिली लापरवाही

डिंडौरी न्यूज । जनपद पंचायत करंजिया अंतर्गत ग्राम पंचायत सैनगूढ़ा के ग्राम सरैहा में शिवनार नाले पर निर्मित पुलिया के क्षतिग्रस्त होने और निर्माण कार्य में अनियमितताओं के मामले में जिला पंचायत ने कार्रवाई की है। जांच में प्रथम दृष्टया पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही पाए जाने पर ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के उपयंत्री भवन प्रसाद भैना को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

मामले में पुलिया निर्माण के लिए निर्धारित मापदंडों के अनुरूप स्थल चयन नहीं किए जाने के साथ ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता, मूल्यांकन एवं सत्यापन में निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किए जाने की शिकायत सामने आई थी। इसके बाद मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत करंजिया द्वारा 27 अगस्त 2026 को मौके पर पहुंचकर जांच की गई।

– 13.59 लाख की स्वीकृति, मजदूरी में 1.86 लाख खर्च

जांच के दौरान सामने आया कि शिवनार नाले पर पुलिया निर्माण कार्य के लिए कुल 13.59 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई थी। इसमें से मजदूरी मद में 1.86 लाख रुपये का व्यय किया जा चुका है। वहीं सामग्री मद की 9.39 लाख रुपये की राशि का देयक मूल्यांकन के बाद भुगतान के लिए नरेगा सॉफ्ट के एमआईएस में दर्ज किया गया था।

जांच में उपयंत्री द्वारा पुलिया निर्माण के लिए निर्धारित मापदंडों के अनुरूप स्थल चयन नहीं किए जाने तथा कार्य के मूल्यांकन एवं सत्यापन में भी नियमों का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आई।

– पहले भी क्षतिग्रस्त हुई थी पुलिया

जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि संबंधित पुलिया पूर्व में भी गुणवत्ताहीन निर्माण के कारण क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। इसके बाद इसकी मरम्मत कराई गई, लेकिन मरम्मत के बावजूद पुलिया दोबारा क्षतिग्रस्त हो गई। वर्तमान स्थिति में पुलिया आवागमन के लिए अनुपयोगी बताई गई है। इससे निर्माण की गुणवत्ता और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा किए गए मूल्यांकन एवं सत्यापन की भूमिका पर सवाल उठे।

– जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर कार्रवाई

प्रकरण में जिला पंचायत डिंडौरी द्वारा 28 अगस्त 2026 को उपयंत्री भवन प्रसाद भैना को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया था। इसके जवाब में उन्होंने 1 सितंबर 2026 को अपना पक्ष प्रस्तुत किया, लेकिन जिला पंचायत द्वारा जवाब का परीक्षण करने के बाद उसे समाधानकारक एवं संतोषजनक नहीं माना गया।

जांच में यह भी पाया गया कि ले-आउट दिए जाने के दो वर्ष बाद भी कार्य पूर्ण नहीं हुआ। इसके अलावा कार्य के मूल्यांकन और एमआईएस में प्रविष्टि के दौरान निर्माण गुणवत्ता पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिए जाने को भी पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही माना गया।

– तत्काल प्रभाव से निलंबन

मामले में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने के बाद मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3 के प्रावधानों के तहत ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, जनपद पंचायत करंजिया के उपयंत्री भवन प्रसाद भैना को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कार्यालय ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, संभाग डिंडौरी निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन-निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। निलंबन आदेश तत्काल प्रभावशील किया गया है।

पुलिया निर्माण में सामने आई अनियमितताओं पर हुई यह कार्रवाई निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, स्थल चयन और शासकीय राशि से जुड़े कार्यों के मूल्यांकन एवं सत्यापन में जिम्मेदारी तय किए जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

 

 

एडीटर

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत ‘मध्यभूमि के बोल’ के संपादक हैं और दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के खुलासे और जमीनी खोजी पत्रकारिता के लिए उनकी पहचान है।...

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