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सीमांकन के निराकरण में डिंडौरी प्रदेश में अव्वल, बंटवारा में 20वीं और नामांतरण में 40वीं रैंक

एडीटर: Chetram Rajpoot September 13, 2026

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– कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया के निर्देशन में राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण पर जोर, लंबित मामलों की लगातार हो रही मॉनिटरिंग

डिंडौरी न्यूज । राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण की दिशा में डिंडौरी जिले ने बेहतर प्रदर्शन किया है। जिले में नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे महत्वपूर्ण राजस्व मामलों के निराकरण की नियमित समीक्षा और मॉनिटरिंग के परिणामस्वरूप सीमांकन के प्रकरणों के निराकरण में डिंडौरी ने प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल किया है।

आज जारी रैंकिंग के अनुसार सीमांकन में डिंडौरी जिले की रैंक 1, बंटवारा में 20 और नामांतरण में 40 रही। सीमांकन के मामलों में प्रदेश स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करना जिले के राजस्व अमले के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

– कलेक्टर के निर्देशन में लगातार समीक्षा

कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया के निर्देशन में जिले में राजस्व प्रकरणों के निराकरण की लगातार समीक्षा की जा रही है। राजस्व अधिकारियों को लंबित प्रकरणों का निर्धारित समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही आमजन को राजस्व संबंधी सेवाएं सहज, सुगम और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन ऐसे राजस्व कार्य हैं, जिनसे सीधे तौर पर आम नागरिकों की भूमि संबंधी आवश्यकताएं जुड़ी होती हैं। इन प्रकरणों के समय पर निराकरण से नागरिकों को कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने से राहत मिल सकती है और भूमि संबंधी प्रक्रियाओं में भी तेजी आती है।

लंबित प्रकरणों के निराकरण में तेजी

जिला प्रशासन द्वारा राजस्व प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग करते हुए लंबित मामलों के निराकरण की गति बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों को प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण करने के साथ ही राजस्व सेवाओं को आमजन के लिए अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

सीमांकन के मामलों में प्रदेश में पहली रैंक हासिल करने के साथ ही बंटवारा और नामांतरण में भी जिले की रैंकिंग दर्ज हुई है। प्रशासन का फोकस राजस्व प्रकरणों के निराकरण में निरंतर सुधार और नागरिकों को समय पर सेवाएं उपलब्ध कराने पर है।

 

एडीटर

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत ‘मध्यभूमि के बोल’ के संपादक हैं और दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के खुलासे और जमीनी खोजी पत्रकारिता के लिए उनकी पहचान है।...

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