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गैर-तकनीकी कर्मचारियों के भरोसे नगर परिषद? भर्ती नियमों की अनदेखी से नागरिक सेवाओं पर सवाल

akvlive.in

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-अधिवक्ता सम्यक जैन ने उठाए गंभीर सवाल, कर्मचारियों की योग्यता से लेकर बिल भुगतान और जमीनी काम तक उच्चस्तरीय जांच की मांग

डिंडौरी न्यूज। नगर परिषद डिंडोरी की कार्यप्रणाली और नागरिकों को उपलब्ध कराई जा रही मूलभूत सेवाओं को लेकर अधिवक्ता सम्यक जैन ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नगर की महत्वपूर्ण सेवाओं का संचालन यदि निर्धारित तकनीकी योग्यता, प्रशिक्षण और जिम्मेदारी के स्पष्ट निर्धारण के बिना कराया जा रहा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। मामला किसी कर्मचारी विशेष को निशाना बनाने का नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का है कि नगरवासियों के पैसे से चलने वाली सेवाएं योग्य हाथों में और निर्धारित मानकों के अनुसार संचालित हो रही हैं या नहीं।

सम्यक जैन ने कहा कि नगर परिषद की जिम्मेदारी केवल कार्यालय में फाइलें चलाने और बिलों का भुगतान करने तक सीमित नहीं है। पेयजल एवं जलशोधन, स्वच्छता और कचरा प्रबंधन, नाली एवं जल निकासी, सड़क एवं सार्वजनिक मार्गों का रखरखाव, स्ट्रीट लाइट, जनस्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएं, सार्वजनिक शौचालय, अग्निशमन एवं आपातकालीन व्यवस्था तथा नगर की सार्वजनिक परिसंपत्तियों का रखरखाव सीधे तौर पर आम नागरिक के जीवन से जुड़े विषय हैं। इन सेवाओं में लापरवाही का असर सीधे जनता पर पड़ता है।

– भर्ती प्रक्रिया की हो निष्पक्ष जांच

उन्होंने सवाल उठाया कि नगर परिषद में नियमित अथवा आउटसोर्सिंग के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति करते समय क्या संबंधित पदों के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, तकनीकी दक्षता, अनुभव और पात्रता का वास्तव में पालन किया गया? यदि तकनीकी प्रकृति के कार्य ऐसे कर्मचारियों को सौंपे गए हैं, जिनके पास निर्धारित योग्यता या आवश्यक प्रशिक्षण नहीं है, तो यह गंभीर प्रशासनिक समीक्षा का विषय है।

सम्यक जैन ने मांग की है कि संबंधित कर्मचारियों के आवेदन पत्र, शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता प्रमाण-पत्र, अनुभव प्रमाण-पत्र, चयन प्रक्रिया, चयन समिति की कार्यवाही, नियुक्ति आदेश और तैनाती संबंधी रिकॉर्ड की जांच की जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि नियुक्ति प्रक्रिया नियमों के अनुरूप हुई या नहीं और नियुक्त कर्मचारियों को किस आधार पर कौन-सी जिम्मेदारी सौंपी गई।

– बिल का भुगतान हो रहा है, तो काम जमीन पर क्यों नहीं दिखता?

सम्यक जैन ने नगर परिषद के खर्च और जमीनी परिणाम के बीच भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि सार्वजनिक धन खर्च होने के बाद उसका परिणाम नागरिकों को दिखाई देना चाहिए।

यदि स्वच्छता पर राशि खर्च होने के बावजूद गंदगी की शिकायतें बनी रहती हैं, विद्युत व्यवस्था पर खर्च के बावजूद स्ट्रीट लाइटें बंद रहती हैं, नालियों और जल निकासी की समस्या बनी रहती है या महत्वपूर्ण सेवाओं के संचालन में पर्याप्त तकनीकी क्षमता नहीं है, तो केवल बिल तैयार होने और भुगतान हो जाने से व्यवस्था को सफल नहीं माना जा सकता।

उन्होंने कहा कि हर सरकारी भुगतान के पीछे जमीन पर दिखाई देने वाला काम और उसकी गुणवत्ता का प्रमाण होना चाहिए।

– जनता के पैसे का हिसाब जनता के सामने हो

अधिवक्ता सम्यक जैन ने कहा कि नगर परिषद को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जिन सेवाओं और कार्यों पर नागरिकों के पैसे से खर्च किया जा रहा है, उसका वास्तविक लाभ नगरवासियों को कितना मिल रहा है। उनका कहना है कि जांच का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को बदनाम करना नहीं, बल्कि व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना होना चाहिए।

उन्होंने मांग की कि संबंधित कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए और दस्तावेजों में दर्ज कार्य तथा मौके पर मौजूद वास्तविक स्थिति का मिलान किया जाए। साथ ही जहां कमी मिले, वहां जिम्मेदारी तय कर सुधारात्मक कार्रवाई की जाए।

*मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों से उच्चस्तरीय जांच की मांग*

सम्यक जैन ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त को प्रतिनिधित्व भेजकर मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। इसमें कर्मचारियों की योग्यता एवं नियुक्ति प्रक्रिया, मूल अभिलेख, कार्यादेश, बिल एवं भुगतान, कार्यों का भौतिक सत्यापन, तकनीकी गुणवत्ता और संबंधित अधिकारियों एवं एजेंसियों की जवाबदेही की जांच की मांग शामिल है।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुरूप पाई जाती हैं तो इससे नगर परिषद की व्यवस्था पर उठ रहे सवालों का भी समाधान होगा। लेकिन यदि अनियमितता सामने आती है तो उसे समय रहते ठीक करना जनहित में आवश्यक होगा।

सम्यक जैन ने कहा, नगर परिषद केवल बिल बनाने और भुगतान करने की व्यवस्था नहीं हो सकती। जनता के पैसे से चलने वाली हर सेवा का असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए। पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और अन्य आवश्यक सेवाओं में योग्य कर्मचारी, स्पष्ट जिम्मेदारी और प्रभावी निगरानी जरूरी है। हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि डिंडोरी के नागरिकों को उनके अधिकार के अनुरूप सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और जवाबदेह नगर सेवाएं मिलें।”

नगर परिषद की व्यवस्थाओं से जुड़े इन सवालों पर अब निगाहें इस बात पर हैं कि शासन-प्रशासन शिकायत में उठाए गए बिंदुओं की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाता है या नहीं। जांच से न केवल कर्मचारियों की नियुक्ति और कार्यप्रणाली की स्थिति स्पष्ट होगी, बल्कि यह भी सामने आएगा कि जनता के पैसों से संचालित नगर सेवाओं का वास्तविक लाभ नागरिकों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच रहा है।

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..