होम राज्य मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़़ क्राइम न्यूज इंटरनेशनल न्यूज कोर्ट न्यूज राजनीति संसदीय संपादकीय अर्थ जगत हेल्थ शिक्षा खेल विज्ञान

पेसा मोबिलाइजरों की बहाली को लेकर आदिवासी समाज लामबंद, सात दिन में निर्णय नहीं तो आंदोलन

akvlive.in

Published

– मुख्यमंत्री के नाम सौंपा सामूहिक ज्ञापन, ग्राम सभाओं के कार्य प्रभावित होने का दावा; ‘पेसा मोबिलाइजर वापस लाओ, जल-जंगल-जमीन बचाओ’ अभियान की चेतावनी।

डिंडौरी। पेसा मोबिलाइजरों की सेवा समाप्ति के विरोध में डिंडौरी जिले में जनजातीय समाज का विरोध तेज होता जा रहा है। जिले की विभिन्न पेसा ग्राम सभाओं के अध्यक्षों, पदाधिकारियों एवं पेसा समितियों ने मुख्यमंत्री के नाम सामूहिक ज्ञापन सौंपकर पेसा मोबिलाइजरों की तत्काल सेवा बहाली की मांग की है। यह ज्ञापन जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को प्रेषित किया गया, जिसमें पंचायत राज संचालनालय के आदेश क्रमांक 8448 दिनांक 18 मई 2026 को निरस्त करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई है।

ज्ञापन में कहा गया है कि जिले की ग्राम पंचायतों में कार्यरत पेसा मोबिलाइजर पिछले लगभग पांच वर्षों से आदिवासी क्षेत्रों में शासन और ग्राम सभाओं के बीच समन्वय स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे थे। उनके माध्यम से वन अधिकार अधिनियम से जुड़े मामलों का निराकरण, लघु वनोपज प्रबंधन, ग्राम स्तरीय विवादों का समाधान, नशा मुक्ति एवं मादक पदार्थ नियंत्रण संबंधी गतिविधियां तथा पेसा ग्राम सभाओं के सशक्तिकरण जैसे कार्य संचालित किए जा रहे थे।

जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि पेसा मोबिलाइजरों की सेवाएं समाप्त किए जाने के बाद कई ग्राम सभाओं में प्रशासनिक एवं विकासात्मक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। उनका दावा है कि ग्राम सभाओं के प्रस्तावों के क्रियान्वयन, वन अधिकार दावों के सत्यापन, तेंदूपत्ता बोनस वितरण तथा अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं के संचालन में कठिनाइयां उत्पन्न हो रही हैं।

पेसा ग्राम सभा अध्यक्षों ने आरोप लगाया कि सेवा समाप्ति जैसा महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले ग्राम सभाओं से कोई राय या परामर्श नहीं लिया गया। उनका कहना है कि पेसा अधिनियम ग्राम सभाओं को विशेष अधिकार प्रदान करता है, ऐसे में ग्राम सभाओं को विश्वास में लिए बिना लिया गया निर्णय आदिवासी हितों के विपरीत है।

ज्ञापन में मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि पंचायत राज संचालनालय द्वारा जारी सेवा समाप्ति आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए तथा सभी पेसा मोबिलाइजरों को पुनः सेवा में बहाल किया जाए। जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधियों ने इसे केवल कर्मचारियों का नहीं बल्कि आदिवासी समाज के अधिकारों और ग्राम सभाओं की कार्यक्षमता से जुड़ा विषय बताया है।

ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर सरकार द्वारा सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो जिले में व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। इसके तहत ग्राम सभाओं की बैठकें आयोजित कर आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी और चरणबद्ध तरीके से विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।

जनजातीय समाज के पदाधिकारियों ने “पेसा मोबिलाइजर वापस लाओ, जल-जंगल-जमीन बचाओ” अभियान चलाने की घोषणा करते हुए कहा कि पेसा व्यवस्था को मजबूत करने और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस निर्णय पर पुनर्विचार करेगी।

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत मध्यभूमि के बोल समाचार पत्र के संपादक हैं। 2013 से इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने madhyabhoomi.in को विश्वसनीय समाचार स्रोत बनाया है, जो मुख्यधारा की मीडिया से अलग, विकास, समानता, आर्थिक और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्रित है। हम सच्चाई और पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए सतत प्रयासरत हैं। बेखौफ कलम... जो लिखता है बेलिबास सच..

संबंधित ख़बरें