डिंडौरी न्यूज । राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत कार्यरत संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर शुक्रवार को प्रदेशव्यापी डिजिटल आंदोलन की शुरुआत की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से कर्मचारियों ने सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने का प्रयास किया और पूर्व में किए गए वादों को पूरा करने की मांग उठाई।
कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारियों के समान सुविधाएं और वेतन नहीं मिल पा रहा है। नियमितीकरण एवं समान कार्य के लिए समान वेतन जैसी मांगों को लेकर कई बार आंदोलन और ज्ञापन दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
डिजिटल अभियान के तहत कर्मचारियों ने विभिन्न सोशल मीडिया माध्यमों पर पोस्ट, संदेश और अभियान चलाकर सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित किया। कर्मचारियों का कहना है कि कोरोना काल सहित विभिन्न स्वास्थ्य आपात परिस्थितियों में उन्होंने अग्रिम पंक्ति में रहकर अपनी सेवाएं दीं, लेकिन उनकी मांगों पर लगातार उपेक्षा बरती जा रही है।
जिला अध्यक्ष ओमप्रकाश उरैती ने कहा कि संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी स्वास्थ्य विभाग की मजबूत नींव हैं, लेकिन वर्षों से असुरक्षा और असमानता के बीच कार्य करने को मजबूर हैं। सरकार ने कई बार नियमितीकरण और वेतन विसंगतियों के समाधान का आश्वासन दिया, लेकिन आज तक उन वादों को धरातल पर नहीं उतारा गया। उन्होंने कहा कि डिजिटल आंदोलन के माध्यम से सरकार को उसके वादों की याद दिलाई जा रही है।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र रूप दिया जाएगा। उनका कहना है कि संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की लगातार उपेक्षा न केवल कर्मचारियों के मनोबल को प्रभावित कर रही है, बल्कि इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है।
इस अवसर पर जिला कोषाध्यक्ष नेहा सिहारें, जिला उपाध्यक्ष उपेन्द्र पारासर एवं जफर खान, जिला मीडिया प्रभारी अनिल साहू, सह मीडिया प्रभारी गिरीश डेहरिया, महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष अंजना धुर्वे, महिला प्रकोष्ठ उपाध्यक्ष रूपा नामदेव, वरिष्ठ मार्गदर्शक सुशील नामदेव, आनंद मोहरे, अंकित चौरसिया, विजय, विशाल नामदेव, डॉ. अंकित अलावे, विक्की जमरा सहित जिले के विभिन्न विकासखंडों डिंडौरी, अमरपुर, समनापुर, बजाग, करंजिया और मेहंदवानी के बड़ी संख्या में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी मौजूद रहे।
कर्मचारियों ने एक स्वर में कहा कि उनकी मांगें पूरी तरह न्यायोचित हैं और सरकार को संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए शीघ्र निर्णय लेना चाहिए। डिजिटल आंदोलन के माध्यम से प्रदेशभर के कर्मचारियों ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए अपने अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा देने का प्रयास किया।










