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मानदेय नहीं तो काम नहीं: आर्थिक तंगी से जूझ रहे मनरेगा संविदा कर्मी 5 दिन के सामूहिक अवकाश पर

रिपोर्ट: Chetram Rajpoot April 30, 2026

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– 04 से 08 मई तक असहयोग आंदोलन, प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप

डिंडौरी। जिले में मनरेगा योजना से जुड़े संविदा कर्मचारियों ने लंबित मानदेय के विरोध में सामूहिक अवकाश पर जाने का बड़ा निर्णय लिया है। कर्मचारियों ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत डिंडौरी को ज्ञापन सौंपकर 04 मई से 08 मई 2026 तक पांच दिवसीय सामूहिक अवकाश पर रहने की सूचना दी है।

ज्ञापन में कर्मचारियों ने बताया कि वे पिछले पांच महीनों से मानदेय के भुगतान से वंचित हैं, जबकि वे लगातार शासन द्वारा सौंपे गए कार्यों को पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं। लंबे समय से वेतन न मिलने के कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कर्मचारियों का कहना है कि बच्चों की स्कूल फीस, बैंक लोन की किस्त, मकान किराया और बिजली बिल तक का भुगतान करना मुश्किल हो गया है।

कई कर्मचारियों को मकान मालिकों के दबाव का सामना करना पड़ रहा है, वहीं फील्ड में कार्य करने के लिए आवागमन तक प्रभावित हो रहा है। कर्मचारियों ने यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने पूर्व में 13 अप्रैल 2026 को भी प्रशासन को ज्ञापन देकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि इसी योजना के अंतर्गत कार्यरत ग्राम रोजगार सहायकों के लिए अन्य मद से मानदेय की व्यवस्था कर दी गई है, जबकि संविदा कर्मचारियों को अब भी नजरअंदाज किया जा रहा है।

ज्ञापन में कर्मचारियों ने पूर्व में जारी पारिश्रमिक कटौती से संबंधित आदेशों को निरस्त करने की मांग भी की है। उनका कहना है कि लगातार अनुरोध के बावजूद समाधान नहीं होने के कारण वे असहयोग आंदोलन के तहत सामूहिक अवकाश पर जाने को मजबूर हुए हैं।

कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही लंबित मानदेय का भुगतान नहीं किया गया, तो वे अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असमर्थ होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

एडीटर

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत ‘मध्यभूमि के बोल’ के संपादक हैं और दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के खुलासे और जमीनी खोजी पत्रकारिता के लिए उनकी पहचान है।...

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