– साइबर अपराध से निपटने को स्किल अपग्रेड जरूरी, पीड़ित सहायता सर्वोच्च प्राथमिकता
भोपाल। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने आज मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी में आयोजित 43वें बैच के उप पुलिस अधीक्षकों के दीक्षांत समारोह में शामिल होकर नवदीक्षित अधिकारियों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने युवा अधिकारियों के उत्साह, अनुशासन और सेवा के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि नई पीढ़ी के ये अधिकारी मध्यप्रदेश पुलिस की भविष्य की सशक्त नींव हैं।
दीक्षांत समारोह के दौरान डीजीपी ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज पुलिसिंग का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक अपराधों के साथ-साथ साइबर अपराध, डिजिटल फ्रॉड, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित अपराध तथा डेटा सुरक्षा जैसी चुनौतियाँ तेजी से सामने आ रही हैं। इनसे प्रभावी रूप से निपटने के लिए तकनीकी दक्षता, आधुनिक संसाधनों का उपयोग और निरंतर स्किल अपग्रेड समय की अनिवार्य आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में बड़े आयोजनों और विशेष परिस्थितियों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती होगा। विशेष रूप से #Simhastha2028 जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों के मद्देनज़र पुलिस अधिकारियों को तकनीक-सक्षम, संवेदनशील और त्वरित निर्णय लेने वाला बनना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य की पुलिसिंग केवल बल प्रयोग तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल इंटेलिजेंस और सामुदायिक सहभागिता पर आधारित होगी।
डीजीपी मकवाणा ने नवदीक्षित अधिकारियों को याद दिलाया कि पुलिस सेवा केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्वपूर्ण सेवा है। पीड़ितों की सहायता, महिलाओं एवं कमजोर वर्गों की सुरक्षा तथा जनता का विश्वास अर्जित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण के साथ कानून का प्रभावी पालन ही एक आदर्श पुलिस अधिकारी की पहचान है।
समारोह के अंत में डीजीपी ने सभी नवदीक्षित उप पुलिस अधीक्षकों को सफल, गौरवपूर्ण और निष्पक्ष सेवा जीवन के लिए शुभकामनाएँ दीं। कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, प्रशिक्षकगण एवं परिवारजन भी उपस्थित रहें।








