– गढ़–मंडला की ऐतिहासिक पहचान से छेड़छाड़ का आरोप, राज्यपाल को सौंपा गया ज्ञापन
– गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने नाम परिवर्तन, भ्रष्टाचार व आदिवासी अधिकारों के उल्लंघन को लेकर उठाए गंभीर सवाल
मंडला न्यूज। गोंडवाना साम्राज्य की ऐतिहासिक राजधानी गढ़–मंडला की पहचान और अस्तित्व से कथित छेड़छाड़, जिले में व्याप्त भ्रष्टाचार, अवैध उत्खनन, पलायन, विस्थापन तथा आदिवासी अधिकारों के उल्लंघन जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने महामहिम राज्यपाल के नाम एक विस्तृत ज्ञापन कलेक्टर मंडला के माध्यम से सौंपा है। ज्ञापन में 17 बिंदुओं में जिले की ज्वलंत समस्याओं को रेखांकित करते हुए तत्काल हस्तक्षेप और कार्यवाही की मांग की गई है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि विश्व इतिहास और भूगोल के अनुसार गोण्डवाना भू-भाग का अत्यंत गौरवशाली अतीत रहा है, जिसकी राजधानी गढ़–मंडला थी। गोण्डवाना साम्राज्य के प्रतापी राजा संग्राम शाह मरावी द्वारा स्वर्ण सिक्कों का प्रचलन तथा लगभग 1750 वर्षों तक गोण्डवाना शासन का इतिहास आज भी जीवंत प्रमाणों के साथ मौजूद है। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में राजा शंकरशाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह मरावी का बलिदान गोण्डवाना के स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बताया गया है।
– नाम बदलने को बताया गया साजिश
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि गढ़–मंडला के ऐतिहासिक नाम से लगातार छेड़छाड़ की जा रही है। माननीय मंत्री द्वारा सार्वजनिक मंच से मंडला का नाम “महिष्मति” करने की घोषणा को गोण्डवाना की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक पहचान मिटाने की साजिश करार दिया गया है। इसके साथ ही रामनगर, मचलेश्वर नगर, रेवांचल पार्क और महिष्मति घाट जैसे नाम परिवर्तनों को इतिहास से छेड़छाड़ बताया गया है, जिन्हें तत्काल मूल नामों से पुनः स्थापित करने की मांग की गई है।
भ्रष्टाचार, घोटाले और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप
ज्ञापन में जिले में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के आरोप लगाते हुए सहकारी बैंक घोटाले, जल जीवन मिशन में अनियमितताओं, DMF फंड के दुरुपयोग तथा अवैध उत्खनन से राजस्व क्षति की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। आरोप है कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र होने के बावजूद ग्राम सभाओं की अनदेखी कर अवैध खनन पट्टे दिए जा रहे हैं, जिससे पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों का हनन हो रहा है।

– पलायन, विस्थापन और सामाजिक संकट
ज्ञापन में बताया गया कि रोजगार के अभाव में जिले से बड़े पैमाने पर पलायन जारी है, जिससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। वहीं विभिन्न परियोजनाओं के नाम पर आदिवासी समुदायों का विस्थापन कर उनके अस्तित्व, भूमि और आजीविका को छीना जा रहा है।
– शिक्षा, स्वास्थ्य और छात्रावासों की बदहाली
शिक्षा व्यवस्था को दयनीय बताते हुए स्कूलों में स्टाफ की कमी, घोटालों और छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल उठाए गए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के चलते गंभीर मरीजों को जबलपुर–नागपुर रेफर करने की मजबूरी को आदिवासी समाज के लिए संकट बताया गया है। आदिम जाति कल्याण विभाग के छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई की कमी और फूड प्वाइजनिंग की घटनाओं पर भी गंभीर चिंता जताई गई है।
– आदिवासी अधिकारों और पेसा कानून के उल्लंघन का आरोप
ज्ञापन में वनाधिकार अधिनियम, पेसा एक्ट और पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों के उल्लंघन, आदिवासी कर्मचारियों को डराने-धमकाने, उनकी शिकायतों पर कार्रवाई न करने तथा जनजातीय भूमि के अवैध हस्तांतरण के आरोप लगाए गए हैं। साथ ही मानव तस्करी, अवैध शराब विक्रय और सांस्कृतिक–खेल प्रतिभाओं की उपेक्षा जैसे मुद्दे भी उठाए गए हैं।

आंदोलन और विरोध प्रदर्शन
इन मांगों के समर्थन में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी द्वारा आयोजित “मंडला बचाव आंदोलन” के तहत प्रभारी मंत्री दिलीप जायसवाल, सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, मंत्री संपतिया उइके एवं कलेक्टर मंडला का पुतला दहन कर विरोध दर्ज कराया गया।
पार्टी ने महामहिम राज्यपाल से मांग की है कि ज्ञापन में उल्लिखित सभी 17 बिंदुओं पर पृथक-पृथक संज्ञान लेकर विभागवार समीक्षा कराई जाए, दोषियों की जिम्मेदारी तय कर कड़ी कार्रवाई की जाए तथा गढ़–मंडला की ऐतिहासिक पहचान और आदिवासी अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि जिले की आम जनता को सम्मानजनक जीवन, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।













