– बजाग के ग्राम खमेरा के श्रमिकों ने विधायक ओमकार सिंह मरकाम को सौंपा आवेदन
– ठेकेदार शिवा पर एक माह काम कराने के बाद मजदूरी नहीं देने और मारपीट करने के लगाए आरोप
डिंडौरी न्यूज।जिले के ग्रामीण अंचलों से रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जाने वाले श्रमिकों के शोषण का एक मामला सामने आया है। बजाग विकासखंड के ग्राम खमेरा के कई श्रमिकों ने महाराष्ट्र में मजदूरी कराने ले जाने वाले ठेकेदार शिवा पर करीब एक माह तक काम कराने के बाद मेहनताना नहीं देने, मजदूरी मांगने पर मारपीट करने और कुछ श्रमिकों को कथित तौर पर रोककर रखने के गंभीर आरोप लगाए हैं। दीपावली का त्योहार नजदीक होने के बावजूद बकाया मजदूरी नहीं मिलने और घर लौटने के लिए किराये की व्यवस्था नहीं होने से श्रमिकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम खमेरा के श्रमिकों को ठेकेदार शिवा काम दिलाने के नाम पर महाराष्ट्र लेकर गया था। वहां श्रमिकों से लगभग एक माह तक काम कराया गया। श्रमिकों का आरोप है कि काम पूरा होने के बाद जब उन्होंने अपनी मेहनत की मजदूरी मांगी तो ठेकेदार ने भुगतान नहीं किया। श्रमिकों ने भोजन और अन्य खर्चों की राशि काटकर शेष मेहनताना देने की मांग की, लेकिन उनकी समस्या का समाधान करने के बजाय कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की गई।
श्रमिकों के मुताबिक, स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब दीपावली का त्योहार नजदीक आ गया। वे अपने परिवारों के बीच पहुंचकर त्योहार मनाना चाहते थे, लेकिन न तो उन्हें उनकी मेहनत की कमाई मिली और न ही घर वापसी के लिए पर्याप्त पैसे उपलब्ध थे। श्रमिकों ने कुछ लोगों को रोककर रखे जाने का आरोप भी लगाया है। ऐसे हालात में उन्हें अपने परिवारों की चिंता के साथ आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।
– विधायक से लगाई गुहार, सौंपा लिखित आवेदन
अपनी परेशानी से निजात पाने और बकाया मजदूरी दिलाने की उम्मीद में प्रभावित श्रमिकों ने डिंडौरी विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक ओमकार सिंह मरकाम से मुलाकात की। श्रमिकों ने उन्हें पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए लिखित आवेदन सौंपा। आवेदन के माध्यम से ठेकेदार द्वारा मजदूरी का भुगतान नहीं किए जाने तथा कथित मारपीट की शिकायत करते हुए बकाया मेहनताना दिलाने और सुरक्षित घर वापसी में मदद की मांग की।
– घर वापसी के लिए विधायक ने दी आर्थिक सहायता
श्रमिकों की व्यथा सुनने के बाद विधायक ओमकार सिंह मरकाम ने मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए उनकी सहायता की। उन्होंने श्रमिकों को महाराष्ट्र से वापस घर पहुंचने के लिए किराये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई। साथ ही दीपावली का त्योहार अपने परिवारों के साथ मना सकें, इसके लिए भी आर्थिक मदद दी। विधायक की इस पहल से आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रमिकों को तत्काल राहत मिली और उनके घर लौटने का रास्ता आसान हुआ।
– श्रमिकों की सुरक्षा और बकाया मजदूरी पर उठे सवाल
इस मामले ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों के श्रमिकों के दूसरे राज्यों में रोजगार के लिए पलायन, उनकी सुरक्षा और समय पर मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रोजगार की तलाश में घर-परिवार छोड़कर दूसरे राज्यों में जाने वाले श्रमिकों को यदि काम कराने के बाद मेहनताना पाने के लिए भी संघर्ष करना पड़े और शिकायत करने पर मारपीट जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़े, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
अब प्रभावित श्रमिकों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए उनकी शिकायत पर संज्ञान लेगा। ठेकेदार के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर बकाया मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित कराने के साथ ही श्रमिकों के साथ कथित मारपीट और उन्हें रोककर रखे जाने के आरोपों पर भी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।



