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वायरल डांस वीडियो के बाद अब निजी स्कूल का मामला, विवादों में घिरीं पर्यवेक्षक स्वप्निल पुरी सेक्टर से हटाईं गईं

एडीटर: Chetram Rajpoot November 4, 2026

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– समनापुर में दिशा पैसेफिक स्कूल की मान्यता और समिति में पदाधिकारी की भूमिका पर उठे सवाल

– स्वतंत्रता दिवस पर वायरल डांस वीडियो को लेकर भी जारी हुआ था नोटिस, अब कार्रवाई की निष्पक्ष जांच पर निगाहें

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डिंडौरी न्यूज।महिला एवं बाल विकास विभाग की समनापुर परियोजना के अंतर्गत गौरा कन्हारी सेक्टर में पदस्थ पर्यवेक्षक श्रीमती स्वप्निल पुरी एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। सरकारी सेवा में रहते हुए निजी विद्यालय के संचालन से जुड़ी भूमिका को लेकर उन पर सवाल उठाए जा रहे हैं। मामला समनापुर में संचालित दिशा पैसेफिक स्कूल की मान्यता, विद्यालय प्रबंधन समिति में उनकी कथित भूमिका और ड्यूटी के दौरान विद्यालय में गतिविधियां संचालित किए जाने के आरोपों से जुड़ा है। मामला सामने आने और शिकायतें उच्च स्तर तक पहुंचने के बाद कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया के निर्देशन में उन्हें सेक्टर से पृथक कर जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास कार्यालय डिंडौरी में पदस्थ किया गया है।

हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर कार्यस्थल में बदलाव के बाद अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या मामला केवल सेक्टर से हटाने तक सीमित रहेगा या सरकारी सेवा नियमों, निजी विद्यालय संचालन में भूमिका और पद के कथित दुरुपयोग से जुड़े आरोपों की विस्तृत जांच भी कराई जाएगी।

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– निजी स्कूल की मान्यता और समिति में भूमिका पर सवाल

प्राप्त जानकारी के अनुसार, समनापुर में संचालित दिशा पैसेफिक स्कूल की मान्यता के लिए श्रीमती स्वप्निल पुरी द्वारा स्वयं आवेदन किए जाने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि रजिस्ट्रार फर्म्स एवं सोसायटी, जबलपुर के समक्ष समिति के वर्तमान पदाधिकारियों की सूची प्रस्तुत करते समय उन्होंने समिति की अध्यक्ष के रूप में स्वयं को शिक्षिका दर्शाया है।

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यदि दस्तावेजों में दर्ज विवरण और विद्यालय संचालन में उनकी भूमिका की पुष्टि होती है, तो यह मामला सरकारी सेवा में रहते हुए निजी शैक्षणिक संस्था से जुड़ाव तथा संबंधित सेवा नियमों की प्रयोज्यता की जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है। सरकारी कर्मचारी द्वारा निजी विद्यालय के संचालन या प्रबंधन में भागीदारी की वैधानिक स्थिति का निर्धारण संबंधित सेवा नियमों, संस्था की वास्तविक संरचना और कर्मचारी की भूमिका के आधार पर किया जाना आवश्यक है।

ऐसे में विद्यालय की मान्यता के लिए प्रस्तुत आवेदन, समिति के पंजीयन संबंधी दस्तावेज, पदाधिकारियों की सूची और विद्यालय के वास्तविक संचालन की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

– ड्यूटी के दौरान विद्यालय में बैठक लेने का भी आरोप

सूत्रों के अनुसार, गौरा कन्हारी सेक्टर में पदस्थ रहने के दौरान पर्यवेक्षक की कार्यप्रणाली को लेकर भी शिकायतें सामने आई थीं। आरोप है कि शासकीय ड्यूटी के समय निजी विद्यालय में पालक-शिक्षक बैठक आयोजित की गई। यदि इस आरोप की पुष्टि होती है, तो यह सरकारी दायित्वों के निर्वहन और कार्यालयीन समय के उपयोग से जुड़ा गंभीर विषय हो सकता है।

इस संबंध में विद्यालय में बैठक आयोजित किए जाने की तारीख, समय, उपलब्ध अभिलेखों और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर तथ्यात्मक जांच किए जाने की आवश्यकता है।

– स्वतंत्रता दिवस पर वायरल वीडियो को लेकर भी जारी हुआ था नोटिस

श्रीमती स्वप्निल पुरी इससे पहले स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर फिल्मी गाने पर नृत्य करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भी चर्चा में आई थीं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वीडियो को लेकर जिला प्रशासन ने उन्हें नोटिस जारी कर जवाब तलब किया था।

अब निजी विद्यालय से जुड़े नए आरोप सामने आने के बाद उनकी कार्यप्रणाली और सरकारी सेवा में रहते हुए कथित निजी व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

– सेक्टर से हटाने के बाद अब जांच और कार्रवाई का इंतजार

महिला एवं बाल विकास विभाग में प्रशासनिक व्यवस्था के तहत श्रीमती स्वप्निल पुरी को सेक्टर से हटाकर जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय में पदस्थ किया गया है। उन्हें प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना से संबंधित कार्य सौंपे जाने की जानकारी भी सामने आई है।

लेकिन इस मामले का महत्वपूर्ण पहलू केवल पदस्थापना में बदलाव नहीं, बल्कि आरोपों की निष्पक्ष जांच है। यदि सरकारी सेवा में रहते हुए निजी विद्यालय के संचालन, प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभाने, सेवा नियमों के उल्लंघन या कार्यालयीन समय के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई का प्रश्न उठेगा।

अब निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर हैं। क्या दिशा पैसेफिक स्कूल की मान्यता संबंधी दस्तावेजों, समिति में पदाधिकारी की भूमिका और ड्यूटी के दौरान विद्यालय में गतिविधियों के आरोपों की जांच कराई जाएगी? क्या संबंधित सेवा नियमों के तहत जवाबदेही तय होगी, या मामला केवल सेक्टर से हटाने तक सीमित रहेगा?

 

एडीटर

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत ‘मध्यभूमि के बोल’ के संपादक हैं और दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के खुलासे और जमीनी खोजी पत्रकारिता के लिए उनकी पहचान है।...

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