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आंगनबाड़ी के नन्हे बच्चों ने किया स्कूल का भ्रमण, खेल-खेल में सीखी विद्यालय की गतिविधियां

एडीटर: Chetram Rajpoot November 2, 2026

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– आकांक्षी विकासखंड बजाग में बच्चों को स्कूली शिक्षा से जोड़ने की अनूठी पहल, विद्यालय के प्रति झिझक दूर कर आत्मविश्वास बढ़ाने पर जोर

डिंडौरी न्यूज । जिले के आकांक्षी विकासखंड बजाग में नन्हे बच्चों को प्राथमिक शिक्षा के लिए तैयार करने और विद्यालय के प्रति आकर्षित करने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा एक सराहनीय पहल की गई। इसके तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को नजदीकी प्राथमिक शालाओं का भ्रमण कराया गया, जहां उन्होंने खेल-खेल में विद्यालय की गतिविधियों को समझा और स्कूली वातावरण से परिचित हुए।

कलेक्टर श्रीमती अंजू पवन भदौरिया के निर्देशानुसार तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के आयुक्त के आदेश के परिपालन में पर्यवेक्षक सुश्री तबस्सुम खान के मार्गदर्शन में सेक्टर लालपुर एवं हर्रा के अंतर्गत संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए यह गतिविधि आयोजित की गई। इसी क्रम में आंगनबाड़ी केंद्र कारोपानी नंबर-1 एवं खरगहना नंबर-1 के बच्चों ने उत्साह के साथ नजदीकी प्राथमिक शालाओं का भ्रमण किया।

दरअसल, संचालनालय महिला एवं बाल विकास विभाग, मध्यप्रदेश भोपाल द्वारा 11 जून 2026 को जारी निर्देशों के अनुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं मुख्य सचिवों की पांचवीं राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के निर्णय के तहत 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को वर्ष में दो बार प्राथमिक शालाओं का एक्सपोजर विजिट कराया जाना है। इसका प्रमुख उद्देश्य बच्चों की विद्यालय पूर्व तैयारी को मजबूत करना और आंगनबाड़ी से प्राथमिक शाला में उनके सहज प्रवेश एवं अंतरण को सुनिश्चित करना है।

भ्रमण के दौरान बच्चों को विद्यालय के कक्षा-कक्ष, प्रार्थना स्थल, पुस्तकालय और खेल मैदान से परिचित कराया गया। शिक्षकों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने संयुक्त कार्ययोजना के तहत अभिभावकों की सहमति से इस गतिविधि का आयोजन किया। इस दौरान बच्चों ने कक्षा का अवलोकन किया, विद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थियों से परिचय प्राप्त किया और कहानी सुनने, चित्रकला एवं खेलकूद जैसी रोचक गतिविधियों में हिस्सा लिया। बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ नाश्ते एवं भोजन की समुचित व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई। भ्रमण के बाद बच्चों ने चित्रों के माध्यम से अपने अनुभव साझा किए।

इस पहल का उद्देश्य छोटे बच्चों के मन से विद्यालय के प्रति झिझक और भय को दूर करना, उनमें आत्मविश्वास एवं सामाजिक सहभागिता विकसित करना तथा पढ़ाई के प्रति स्वाभाविक रुचि पैदा करना है। आंगनबाड़ी और प्राथमिक शाला के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर बच्चों को शुरुआती स्तर पर ही स्कूली वातावरण से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि विद्यालय में प्रवेश के समय उन्हें किसी तरह की असहजता महसूस न हो और वे अपनी नई शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत उमंग, उत्साह एवं आत्मविश्वास के साथ कर सकें।

 

 

एडीटर

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत ‘मध्यभूमि के बोल’ के संपादक हैं और दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के खुलासे और जमीनी खोजी पत्रकारिता के लिए उनकी पहचान है।...

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