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उम्र छोटी, उपलब्धि बड़ी! प्रखर विश्वकर्मा 40 से अधिक देशों के बच्चों को दे रहे अंतरिक्ष विज्ञान का ज्ञान

एडीटर: Chetram Rajpoot November 2, 2026

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– टीकमगढ़ के युवा वैज्ञानिक प्रखर विश्वकर्मा को नई दिल्ली में मिला ‘भारत के सबसे युवा प्रशिक्षक’ का सम्मान

– 40 से अधिक देशों के 1000 से ज्यादा बच्चों को दे रहे अंतरिक्ष विज्ञान की शिक्षा, एयरोस्पेस और रॉकेट साइंस के प्रति युवाओं में जगा रहे रुचि

भोपाल न्यूज। बुंदेलखंड की प्रतिभा अब अंतरिक्ष विज्ञान, एयरोस्पेस तकनीक और वैज्ञानिक शिक्षा के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। टीकमगढ़ जिले के युवा वैज्ञानिक एवं अंतरिक्ष शिक्षक प्रखर विश्वकर्मा को नई दिल्ली में आयोजित इंडिया स्कूल लीडरशिप समिट एंड अवार्ड्स 2026 में ‘भारत के सबसे युवा प्रशिक्षक’ के सम्मान से नवाजा गया। 25 अक्टूबर 2026 को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी), नई दिल्ली में आयोजित समारोह में वर्ल्ड अलायंस ऑफ स्कूल प्रिंसिपल्स (WASP) की ओर से उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। पुरस्कार एंबेसडर डॉ. ओफाडिले टी. गोफामोडिमो ने प्रदान किया। कम उम्र में विज्ञान एवं तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने वाले प्रखर की यह उपलब्धि उनके प्रयासों को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव है।

– इंजीनियरिंग की पढ़ाई के साथ अंतरिक्ष विज्ञान में सक्रिय

प्रखर विश्वकर्मा वर्तमान में भोपाल के बंसल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (BIST) में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के द्वितीय वर्ष के विद्यार्थी हैं। नियमित पढ़ाई के साथ वे अंतरिक्ष विज्ञान, एयरोस्पेस तकनीक और वैज्ञानिक शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय हैं। उन्होंने एयरोएक्स स्पेस टेक्नोलॉजी की स्थापना कर विद्यार्थियों के बीच वैज्ञानिक सोच विकसित करने, तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करने और अंतरिक्ष से जुड़े जटिल विषयों को सरल तरीके से समझाने की दिशा में पहल की है।

उनकी यह पहल इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों को शुरुआती स्तर पर ही सही जानकारी, मार्गदर्शन और सीखने के अवसर मिल सकें। प्रखर का प्रयास है कि विद्यार्थी केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान और आधुनिक तकनीक की कार्यप्रणाली को भी समझें।

– 40 से अधिक देशों के विद्यार्थियों तक पहुंची अंतरिक्ष शिक्षा

प्रखर की शैक्षणिक गतिविधियों का प्रमुख पहलू अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विद्यार्थियों से जुड़ना है। उनके अनुसार, वे 40 से अधिक देशों के 1000 से ज्यादा बच्चों को स्पेस टेक्नोलॉजी, एयरोस्पेस और रॉकेट साइंस जैसे विषयों की शिक्षा एवं मार्गदर्शन दे रहे हैं। इन विषयों के माध्यम से विद्यार्थियों को रॉकेट की कार्यप्रणाली, अंतरिक्ष अभियानों की योजना, उपग्रहों की भूमिका और आधुनिक अंतरिक्ष तकनीक के उपयोग को समझने का अवसर मिलता है।

प्रखर का उद्देश्य अंतरिक्ष विज्ञान की शिक्षा को बड़े शहरों और चुनिंदा शैक्षणिक संस्थानों तक सीमित न रखते हुए अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंचाना है। वे चाहते हैं कि छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थी भी अंतरिक्ष विज्ञान के बारे में जानें, सवाल पूछें और भविष्य में वैज्ञानिक, इंजीनियर तथा शोधकर्ता बनने की दिशा में आगे बढ़ें।

उनकी पहल का जोर विज्ञान के प्रति जिज्ञासा पैदा करने और तकनीकी विषयों को सहज भाषा में समझाने पर है, ताकि विद्यार्थी कम उम्र से ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित कर सकें।

– एयरोस्पेस और रक्षा तकनीक में नवाचार पर जोर

एयरोएक्स स्पेस टेक्नोलॉजी के संस्थापक के रूप में प्रखर अंतरिक्ष एवं रक्षा प्रौद्योगिकी से संबंधित नवाचारों की दिशा में भी काम कर रहे हैं। उनका विशेष ध्यान एयरोस्पेस तकनीक, रॉकेट प्रणालियों और भविष्य की अंतरिक्ष संबंधी आवश्यकताओं से जुड़े विचारों तथा प्रोटोटाइप विकास पर है।

उनका मानना है कि अंतरिक्ष और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में भारत की क्षमताओं को आगे बढ़ाने के लिए युवाओं को शुरुआती स्तर से ही वैज्ञानिक ज्ञान, इंजीनियरिंग कौशल और अनुसंधान के अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से वे विद्यार्थियों को तकनीकी विषयों की सैद्धांतिक जानकारी के साथ डिजाइन, नवाचार और समस्या-समाधान की प्रक्रिया से परिचित कराने पर जोर देते हैं।

इस प्रकार की पहल विद्यार्थियों में तकनीकी समझ विकसित करने और उन्हें भविष्य की वैज्ञानिक चुनौतियों के लिए तैयार करने में सहायक हो सकती है।

– प्रतिभा को अवसरों से जोड़ने की सोच

प्रखर विश्वकर्मा की सोच है कि किसी विद्यार्थी की प्रतिभा केवल उसकी आर्थिक स्थिति, भौगोलिक क्षेत्र या उपलब्ध संसाधनों से निर्धारित नहीं होनी चाहिए। सही मार्गदर्शन, सीखने के अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर छोटे शहरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थी भी विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नई संभावनाएं तलाश सकते हैं।

इसी सोच के साथ वे विद्यार्थियों के बीच अंतरिक्ष विज्ञान और खगोल विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई, तकनीकी परियोजनाओं और विद्यार्थियों को मार्गदर्शन देने जैसी जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना उनके लिए चुनौतीपूर्ण है। इसके बावजूद वे अंतरिक्ष शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने और युवा पीढ़ी को विज्ञान आधारित भविष्य के निर्माण के लिए प्रेरित करने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

– बुंदेलखंड के युवाओं के लिए प्रेरणादायी उपलब्धि

टीकमगढ़ जैसे जिले से निकलकर अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाना स्थानीय युवाओं के लिए प्रेरणादायी उदाहरण है। प्रखर विश्वकर्मा की यात्रा यह संदेश देती है कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए केवल महानगरों में उपलब्ध अवसर ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि निरंतर सीखने, मेहनत करने और नए विचारों पर काम करने की इच्छाशक्ति भी अहम भूमिका निभाती है।

नई दिल्ली में ‘भारत के सबसे युवा प्रशिक्षक’ का सम्मान प्राप्त कर प्रखर ने अपनी शैक्षणिक और तकनीकी यात्रा में एक नया पड़ाव जोड़ा है। अब उनके सामने अंतरिक्ष विज्ञान की शिक्षा को अधिक विद्यार्थियों तक पहुंचाने, एयरोस्पेस तकनीक में नवाचार को आगे बढ़ाने और युवा पीढ़ी को विज्ञान एवं अनुसंधान के प्रति प्रेरित करने की दिशा में अपने प्रयासों को और व्यापक बनाने का अवसर है।

प्रखर की यह पहल शिक्षा, विज्ञान और तकनीकी नवाचार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। उनकी उपलब्धि बुंदेलखंड के उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद विज्ञान और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने का सपना देखते हैं।

 

एडीटर

Chetram Rajpoot

चेतराम राजपूत ‘मध्यभूमि के बोल’ के संपादक हैं और दो दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। स्थानीय मुद्दों, भ्रष्टाचार के खुलासे और जमीनी खोजी पत्रकारिता के लिए उनकी पहचान है।...

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