– डिंडौरी जिले में 7 वर्ष से अधिक समय से पदस्थ अधीक्षकों को सत्र के बीच नहीं बदलने की मांग, आदेश का क्रियान्वयन सत्र 2027-28 से करने का किया आग्रह
डिंडौरी न्यूज । मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स-AJJAKS) की डिंडौरी जिला शाखा ने जनजातीय कार्य विभाग एवं अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के छात्रावासों, आश्रम शालाओं और आवासीय विद्यालयों में पदस्थ अधीक्षकों के स्थानांतरण को लेकर आपत्ति जताई है। संघ ने शैक्षणिक सत्र के बीच लंबे समय से पदस्थ अधीक्षकों को परिवर्तित नहीं करने की मांग करते हुए इस संबंध में जारी निर्देशों के क्रियान्वयन को आगामी शैक्षणिक सत्र 2027-28 से लागू करने का अनुरोध किया है।
इस संबंध में अजाक्स डिंडौरी के जिला अध्यक्ष बिहारी सिंह परस्ते द्वारा 21 अक्टूबर 2026 को आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग, भोपाल के नाम ज्ञापन सौंपा गया है। ज्ञापन जिला दंडाधिकारी डिंडौरी के माध्यम से भेजा गया है। इसमें विभाग द्वारा जारी निर्देश पत्र क्रमांक 1818/भोपाल, दिनांक 11 अक्टूबर 2026 के संबंध में संघ की ओर से राहत प्रदान करने का आग्रह किया गया है।
– अनुसूचित जिले में स्थानीय परिस्थितियों का दिया हवाला
ज्ञापन में कहा गया है कि डिंडौरी पूर्णतः अनुसूचित जिला है। यहां संचालित छात्रावासों, आश्रमों एवं आवासीय विद्यालयों में पदस्थ अधीक्षकों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के बीच बदलने से अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। संघ ने स्थानीय बोली-भाषा, बच्चों की देखभाल, खान-पान और अध्ययन संबंधी व्यवस्थाओं को इसका प्रमुख आधार बताया है।
संघ का कहना है कि छात्रावासों एवं आवासीय विद्यालयों में अधीक्षकों की भूमिका केवल प्रशासनिक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि विद्यार्थियों की दैनिक देखभाल और उनकी शैक्षणिक गतिविधियों से भी जुड़ी होती है। ऐसे में सत्र के बीच अधीक्षकों में बदलाव होने पर विद्यार्थियों को नई व्यवस्था के साथ तालमेल बैठाने में परेशानी हो सकती है। इससे उनकी पढ़ाई और परीक्षा परिणाम भी प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
– सत्र 2027-28 से लागू करने की मांग
अजाक्स ने विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग करते हुए आग्रह किया है कि विभागीय निर्देश के पालन में शिथिलता प्रदान की जाए और अधीक्षकों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के बीच परिवर्तित करने के बजाय आदेश का क्रियान्वयन नवीन शैक्षणिक सत्र 2027-28 से किया जाए। संघ का मानना है कि इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई, देखभाल और छात्रावासों की व्यवस्थाएं प्रभावित होने से बचाई जा सकेंगी।
