– पर्यावरणीय मंजूरियों में कथित अनियमितताओं और प्राधिकरण के कामकाज में बाधा डालने के आरोप; पूरे मामले की CBI जांच कराने की भी मांग
भोपाल। मध्यप्रदेश राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) के अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर तीन वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। 16 अक्टूबर 2026 को जारी पत्र में अध्यक्ष ने अतिरिक्त मुख्य सचिव अनिरुद्ध मुखर्जी, प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी और SEIAA के सदस्य सचिव हर्षल पंचोली पर प्राधिकरण के कामकाज में बाधा डालने, पर्यावरण कानूनों के कथित उल्लंघन और गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। पत्र में संबंधित मामलों की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने का अनुरोध भी किया गया है।
– पर्यावरणीय मंजूरियों और प्राधिकरण के कामकाज पर उठाए सवाल
मुख्य सचिव को संबोधित पत्र क्रमांक 91/SEIAA/2026 में अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि संबंधित अधिकारियों के कार्यों से SEIAA के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। पत्र के अनुसार, प्राधिकरण के अध्यक्ष कक्ष का इंटरनेट बंद कर दिया गया और SEIAA का पोर्टल लगभग तीन महीने से बंद होने की बात कही गई है। अध्यक्ष ने इसे प्राधिकरण के नियमित कामकाज में बाधा बताते हुए जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि SEIAA के कामकाज का अनुभव रखने वाले कर्मचारियों को हटाकर ऐसे कर्मचारियों को पदस्थ किया गया, जिन्हें संबंधित कार्यों का पर्याप्त अनुभव नहीं है। अध्यक्ष ने दावा किया है कि लंबे समय तक प्राधिकरण में कार्य करने वाले कुछ कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की गईं, जबकि अन्य कर्मचारियों की पदस्थापना और सेवा समाप्ति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
– कर्मचारियों की पदस्थापना और बैठकों को लेकर आपत्ति
पत्र में अध्यक्ष के निजी सहायक के रूप में राजनेश नामक कर्मचारी की पदस्थापना का उल्लेख करते हुए दावा किया गया है कि उन्हें टाइपिंग का पर्याप्त ज्ञान नहीं है। इसी तरह, वकील पवार नामक व्यक्ति की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए गए हैं। पत्र में उनके स्वास्थ्य और चलने-फिरने में परेशानी का उल्लेख करते हुए पदस्थापना की उपयुक्तता पर आपत्ति जताई गई है।
अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि SEIAA के कर्मचारियों में बार-बार बदलाव किया जा रहा है। पत्र के अनुसार, एक वर्ष में 20 से अधिक बार कर्मचारियों में फेरबदल किया गया। इसके अलावा, सदस्य सचिव द्वारा बैठकों को नियमित रूप से आयोजित नहीं करने, बार-बार पुनर्निर्धारित करने तथा कार्यवाही विवरण (Minutes of Meeting) समय पर तैयार नहीं किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
– 237 Deemed EC जारी करने का आरोप
पत्र में पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी और सदस्य सचिव पर 237 Deemed Environmental Clearance (Deemed EC) जारी किए जाने का आरोप लगाया गया है। अध्यक्ष ने दावा किया है कि संबंधित मंजूरियां कानूनी प्रावधानों के विपरीत जारी की गईं। उन्होंने पत्र में कहा है कि पर्यावरणीय मंजूरी जारी करने के अधिकार और प्रक्रिया से जुड़े नियमों की जांच आवश्यक है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित मंजूरियों के दस्तावेजों की विस्तृत जांच के बिना इन्हें स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि संबंधित अधिकारियों ने इन आरोपों पर क्या पक्ष रखा है।
– केंद्र सरकार को पत्राचार और सेवा समाप्ति का भी उल्लेख
पत्र में भारत सरकार द्वारा पदस्थ किए गए एक अधिकारी अश्विनी कुमार को हटाने के लिए केंद्र सरकार को डीओ (D.O.) पत्र भेजने और संबंधित मंत्रालय के अधिकारियों से संपर्क करने का भी उल्लेख किया गया है। अध्यक्ष ने कार्यालय सहायक पूनम झा को सेवा समाप्ति का नोटिस दिए जाने का जिक्र करते हुए इन घटनाओं को प्राधिकरण के कामकाज से जुड़ी समस्याओं के रूप में प्रस्तुत किया है।
– केंद्र और राज्य सरकार से कार्रवाई की मांग
SEIAA अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने पत्र के अंत में राज्य सरकार और भारत सरकार से पूरे मामले को गंभीरता से लेने का अनुरोध किया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने, उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने तथा कथित अनियमितताओं से जुड़े मामलों में आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने की मांग की है।
इसके साथ ही पत्र में कथित घोटाले से संबंधित कार्यों और अभिलेखों की CBI से जांच कराने का अनुरोध किया गया है। पत्र की प्रतिलिपि भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव, मध्यप्रदेश के अपर मुख्य सचिव तथा SEIAA की सदस्य डॉ. सुनीता सिंह को भी भेजे जाने का उल्लेख है।
