डिंडौरी न्यूज । मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स) ने भोपाल में 13 अक्टूबर 2026 को आयोजित गोंडवाना छात्र संघ की रैली के दौरान जनजातीय समाज के छात्रों के साथ कथित अभद्रता, गाली-गलौज और सांस्कृतिक पहचान के अपमान का गंभीर मामला उठाया है। संघ ने इस संबंध में मध्यप्रदेश की राज्यपाल मंगुभाई पटेल को संबोधित ज्ञापन पत्र कलेक्टर, डिंडौरी के माध्यम से भेजकर दोषी पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।
अजाक्स संघ के जिला शाखा अध्यक्ष बिहारी सिंह परस्ते, जीएसयू, जयस, भीम आर्मी द्वारा सयुंक्त रूप से 21 अक्टूबर 2026 को सौंपे गए ज्ञापन पत्र में उल्लेख है कि भोपाल में गोंडवाना छात्र संघ की रैली के दौरान पुलिस ने कुछ छात्रों को हिरासत में लिया। इस दौरान पुलिस निरीक्षक रतन सिंह परिहार एवं अन्य पुलिसकर्मियों पर जनजातीय समाज के प्रति अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने और समाज की पारंपरिक सांस्कृतिक पहचान ‘जोहार’ शब्द का अपमान करने का आरोप लगाया गया है।
शिकायत में कहा गया है कि कथित घटनाक्रम के दौरान छात्रों के साथ अमर्यादित व्यवहार किया गया तथा मां-बहन को लेकर अशोभनीय और आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। संघ ने दावा किया है कि संबंधित घटनाक्रम के वीडियो साक्ष्य भी उपलब्ध हैं।
– संवैधानिक मूल्यों और जनजातीय सम्मान का मुद्दा उठाया
अजाक्स ने शिकायत में कहा है कि सार्वजनिक जीवन में किसी समुदाय के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक सद्भाव के विपरीत है। संघ ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लेख करते हुए आरोपित आचरण को जनजातीय समाज की गरिमा और सांस्कृतिक अस्मिता पर चोट बताया है।
शिकायत पत्र में पुलिस अधिनियम, 1861 की धाराओं 23 एवं 29 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की प्रासंगिक धाराओं का उल्लेख करते हुए मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। संघ का कहना है कि यदि सार्वजनिक स्थान पर जनजातीय समाज के सदस्यों को जानबूझकर अपमानित किया गया है, तो मामले की निष्पक्ष जांच कर विधि के अनुसार जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
– सेवा से बर्खास्तगी और एफआईआर की मांग
अजाक्स ने राज्यपाल से मांग की है कि पुलिस निरीक्षक रतन सिंह परिहार सहित कथित रूप से संलिप्त अन्य पुलिसकर्मियों के विरुद्ध निष्पक्ष जांच कराई जाए। दोष सिद्ध होने पर संबंधित कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त करने तथा SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की लागू धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
संघ ने इस मामले में शासन और पुलिस प्रशासन से गंभीरता से संज्ञान लेने का आग्रह किया है। शिकायत पत्र की प्रतिलिपि मध्यप्रदेश शासन के मुख्य सचिव सहित संबंधित अधिकारियों को भी भेजे जाने का उल्लेख है।
